Бас ки дидам ҳамаи сӯи он бути ҳрҷоӣӣ ро

بس که دیدم همه سو آن بت هرجائی را

Ҳеҷ нштохтаҳам маънии танҳоӣ ро

هیچ نشتاخته‌ام معنی تنهایی را

Нест мағзами дамӣ аз накҳати зулфаши холӣ

نیست مغزم دمی از نکهت زلفش خالی

То чаҳ сараст ниҳони ин сари сўдоӣӣ ро

تا چه سرّ است نهان این سر سودائی را

Зоҳдои даври шӯ аз бода прессатон ки биттабъ

زاهدا دور شو از باده‌پرستان که بالطبع

Тоб хушкӣ набӯд мардуми дрёӣӣ ро

تاب خشکی نبود مردم دریائی را

То ки машғӯли сифотӣ , набарӣ роҳ ба зот

تا که مشغول صفاتی، نبری راه به ذات

Бигузар аз олами негар талабии ноӣӣ ро

بگذر از عالم نی گر طلبی نائی را

Дар мижа то чаҳ фусун бошадаш он хусрави ҳасан

در مژه تا چه فسون باشدش آن خسرو حسن

То ба акнӯн ки накӯ карда сафи ороӣӣ ро

تا به اکنون که نکو کرده صف آرائی را

Сими ашку зари чеҳрам буд ар ҳеҷам нест

سیم اشک و زر چهرم بود ار هیچم نیست

Ишқ ту дода ба ман фақру тўоноӣӣ ро

عشق تو داده به من فقر و توانائی را

Зери ин тоқ муқарнас насазад манзили дил

زیر این طاق مقرنس نسزد منزل دل

Хона сахтаст макони мардуми сҳроӣӣ ро

خانه سخت است مکان مردم صحرائی را

Кӯр бояд назар аз ҳар чаҳ ба ҷузи талъати дӯст

کور باید نظر از هر چه به جز طلعت دوست

Грчўи Ҷайҳуни талабии лиззати бенаӣ ро

گرچو جیحون طلبی لذت بینایی را

Никномӣаст чу матбӯъ ба даврони амир

نیکنامی است چو مطبوع به دوران امیر

Мапаснд аз дили мо ин ҳамаи рсўоӣӣ ро

مپسند از دل ما این همه رسوائی را

Хони дарёи дили софии гуҳари род , ҳусайн

خان دریا دل صافی گهر راد، حسین

Ки фалаки хатми бадви сохтаи мўлоӣӣ ро

که فلک ختم بدو ساخته مولائی را