Магари ойинаи акс ту шуд ҷоми шароби имшаб
مگر آئینه عکس تو شد جام شراب امشب
Ки дар саҳбои раг талхӣаст мавҷи моҳтоби имшаб
که در صهبا رگ تلخی است موج ماهتاب امشب
Пурди пар дар пари хокистари парвонаи парвонаи ранги гул
پرد پر در پر خاکستر پروانه پروانه رنگ گل
Барояд шамъи равшангар зи фонӯси ниқоби имшаб
برآید شمع روشن گر ز فانوس نقاب امشب
зи кӯй май фурӯашони боз сармастона ме ояд
ز کوی می فروشان باز سرمستانه می آید
Надорам аз ту эй бахти ситамгари чашми хоби имшаб
ندارم از تو ای بخت ستمگر چشم خواب امشب
Диламро ӣнқадарҳо тоб улфат нест , май тарсам
دلم را اینقدرها تاب الفت نیست، می ترسم
Ки гардад хомсўз аз гармии маҷлиси кабоби имшаб
که گردد خامسوز از گرمی مجلس کباب امشب
Магар шуд хотираши ойинаи ёдам ки ме ёбам
مگر شد خاطرش آئینه یادم که می یابم
з ҳар шаби бештар дар хеши ҷӯёи изтироби имшаб
ز هر شب بیشتر در خویش جویا اضطراب امشب