Дилами нахуст ки дил бар вафои ёри ниҳод
دلم نخست که دل بر وفای یار نهاد
Ба беқарорӣ бо хештани қарори ниҳод
به بی قراری با خویشتن قرار نهاد
зи ҷон умед бибареду дили зи сари бардошт
ز جان امید ببّرید و دل ز سر برداشت
Пас ангҳии қадами андари раҳи устувори ниҳод
پس انگهی قدم اندر ره استوار نهاد
Бигард хеш чу паргор май дӯд бар сар
بگرد خویش چو پرگار می دود بر سر
Кунун ки пои талаб дар миёни кои ниҳод
کنون که پای طلب در میان کا نهاد
Ҳар он ситам ки з дилдор дид дар раҳи ишқ
هر آن ستم که ز دلدار دید در ره عشق
Гуноҳи он ҳама бар бахту рӯзгори ниҳод
گناه آن همه بر بخت و روزگار نهاد
зи тангнои дилам чун биҷуст қатраи ашк
ز تنگنای دلم چون بجست قطرۀ اشک
зи роҳи дидаи равони сари бкўии ёри ниҳод
ز راه دیده روان سر بکوی یار نهاد
Ҳар он сияҳгаре кони дўзлФ бо ман кард
هر آن سیه گریی کان دوزلف با من کرد
Бирафт ва як як бар дасти оннигор ниҳод
برفت و یک یک بر دست آن نگار نهاد
зи бими танагии андари ҳисори синаи дилам
ز بیم تنگی اندر حصار سینه دلم
Захираи ғаму андӯҳ бе шумори ниҳод
ذخیرۀ غم و اندوه بی شمار نهاد
Марои бхўни дили худ чу ташна дид фалак
مرا بخون دل خود چو تشنه دید فلک
Бадаст гиряам ин ком дар канори ниҳод
بدست گریه ام این کام در کنار نهاد
Ҳам аз наво дар айёми дон ки наргиси ту
هم از نوا در ایّام دان که نرگس تو
Марои басони гул аз нӯки ғамзаи хори ниҳод
مرا بسان گل از نوک غمزه خار نهاد
Касе ки номи фироқи ту бар забон оварад
کسی که نام فراق تو بر زبان آورد
Чунон буд ки забон дар даҳони мори ниҳод
چنان بود که زبان در دهان مار نهاد
Висолро чаҳ кунам зин сипас ? ки мояи умр
وصال را چه کنم زین سپس؟ که مایۀ عمر
Фироқ ӯ ҳама дар роҳи интизори ниҳод
فراق او همه در راه انتظار نهاد