эй бузургӣ ки дар ҷаҳони карам

ای بزرگی که در جهان کرم

Кас чу ту дод астноъи надод

کس چو تو داد اصطناع نداد

Бидиҳад сари зи дасти онкии туро

بدهد سر ز دست آنکه ترا

Гардан аз рӯй имтиноъи надод

گردن از روی امتناع نداد

Будам аз ту басии таваққуъҳо

بودم از تو بسی توقّعها

Бахти тавфиқи иҷтимои надод

بخت توفیق اجتماع نداد

Бо ки гӯям ки хоҷаи шеъри маро

با که گویم که خواجه شعر مرا

Беш ташрифи истимоъи надод ?

بیش تشریف استماع نداد؟

Ба суханҳои ҳамчуи оби зулол

به سخنهای همچو آب زلال

Қимати шарбатии Фқоъи надод

قیمت شربتی فقاع نداد

На зи тақсир буд агар ходим

نه ز تقصیر بود اگر خادم

Дар чунин ҳолатати сдоъи надод

در چنین حالتت صداع نداد

Зонка як рӯй дар тақозо дошт

زانکه یک روی در تقاضا داشت

Хари дами рухсати видоъи надод

خر دم رخصت وداع نداد