эй барқарори хӯбӣ , бо ту қарори ман чаҳ
ای برقرار خوبی، با تو قرار من چه
Аз сиккаи гашти корам , тадбири кори ман чаҳ
از سکه گشت کارم، تدبیر کار من چه
Заррини рухами зи ишқат беобу санги монда
زرین رخم ز عشقت بیآب و سنگ مانده
Бар санг ту надонам обу айёри ман чаҳ
بر سنگ تو ندانم آب و عیار من چه
Бар буии васл то кӣ дарди сари фироқат
بر بوی وصل تا کی درد سر فراقت
Он май ҳануз дар хами чандини хумори ман чаҳ
آن می هنوز در خم چندین خمار من چه
Додам ба боди умрӣ дар интизори рӯзӣ
دادم به باد عمری در انتظار روزی
Ин рӯз беМуродӣ дар интизори ман чаҳ
این روز بیمرادی در انتظار من چه
Дидам ба толеъи худ ишқ омад ихтиёрам
دیدم به طالع خود عشق آمد اختیارم
Ин доғи ноумедӣ бар ихтиёри ман чаҳ
این داغ ناامیدی بر اختیار من چه
Зинҳор то нагӯйӣ кин ғам ба сабр бинишон
زنهار تا نگویی کاین غم به صبر بنشان
Гар сабри ғами нишондии пас зинҳор ман чаҳ
گر صبر غم نشاندی پس زینهار من چه
Гўӣӣ ба ҳеҷ аҳдии як ошно набӯда аст
گوئی به هیچ عهدی یک آشنا نبوده است
Ин қаҳти ошноён дар рӯзгори ман чаҳ
این قحط آشنایان در روزگار من چه
Хоқонё чаҳ гӯйӣ ояд ба дасти ёрӣ
خاقانیا چه گویی آید به دست یاری
Чун ёр нест мумкини савдоаши ёри ман чаҳ
چون یار نیست ممکن سوداش یار من چه