Чу ҳечгуна надорам бҳзрти ту маҷол

چو هیچگونه ندارم بحضرت تو مجال

Шавам муқӣм дарат болғдўу алосол

شوم مقیم درت بالغدّو و الآصال

Шигифт нест агар сайди гашти мурғи дилам

شگفت نیست اگر صید گشت مرغ دلم

Ки дар ҳавои ту симурғ бификанад пару бол

که در هوای تو سیمرغ بفکند پر و بال

Крои висол муяссар шавад ки дар Кувайт

کرا وصال میسّر شود که در کویت

Маҷол нест касеро магари насими шимол

مجال نیست کسی را مگر نسیم شمال

Нишастаам мутарассид ки аз дарича ӣ субҳ

نشسته ام مترصّد که از دریچه ی صبح

Магар тулӯъ кунад офтоби рӯзи висол

مگر طلوع کند آفتاب روز وصال

зи хоками оташи ишқат ҳануз шуъла занад

ز خاکم آتش عشقت هنوز شعله زند

Чу бигузарӣ басари хоки ман пас аз сад сол

چو بگذری بسر خاک من پس از صد سال

Туро агар чаҳ зи амсоли мо малол гирифт

ترا اگر چه ز امثال ما ملال گرفت

Гирифт битўи маро аз ҳаёти хеши малол

گرفت بیتو مرا از حیات خویش ملال

Муқӣм дар дили хоҷуи тўӣӣ ва майдонӣ

مقیم در دل خواجو توئی و میدانی

Чаҳ ҳоҷатаст бтқрир бо ту сӯрати ҳол

چه حاجتست بتقریر با تو صورت حال