Субҳони ман тақаддуси болъзу алҷлол

سبحان من تقدّس بالعزّ و الجلال

Субҳони ман тФрди болҷўду алҷмол

سبحان من تفرّد بالجود و الجمال

Он моликӣ ки миллат ӯ ҳаст бар давом

آن مالکی که ملکت او هست بر دوام

Ваон қодирӣ ки қудрат ӯ ҳаст бар камол

وان قادری که قدرت او هست بر کمال

Султон бевазиру ҷаҳондори лами изл

سلطان بی وزیر و جهاندار لم یزل

Дён беназиру худованди лоязол

دیان بی‌نظیر و خداوند لایزال

Гуёӣ беталаффузу биноӣ бе басар

گویای بی‌تلفظ و بینای بی‌بصر

Доноӣ бетафаккуру дороӣ бе малол

دانای بی‌تفکّر و دارای بی‌ملال

Тасбеҳи булбули саҳарии ҳии лоином

تسبیح بلبل سحری حی لاینام

Вирди забони Кебеки дарии раби зулҷалол

ورد زبان کبک دری رب ذوالجلال

Ҳарфии сети коф ва навен зи тўомири сунъ ӯ

حرفی‌ست کاف و نون ز طوامیر صنع او

Вази қоф то ба қофи барин ҳарф гашта дол

وز قاف تا به قاف برین حرف گشته دال

Аз оби лутф ӯ мутабассим шавад риёз

از آب لطف او متبسّم شود ریاض

Вази боди қаҳр ӯ мутазалзил шавад ҷибол

وز باد قهر او متزلزل شود جبال

Дар гӯш осмон кашад аз зари мағрибӣ

در گوش آسمان کشد از زرّ مغربی

Ҳар ма ба амр кун Фикўни ҳалқаи ҳилол

هر مه به امر کن فیکون حلقهٔ هلال

Гоҳе зи моҳ нав кунад абрӯии золи зар

گاهی ز ماه نو کند ابروی زال زر

Гоҳе аз офтоб кашад теғи пӯри зол

گاهی از آفتاب کشد تیغ پور زال

Кайвон ба ҳукм ӯст барин бурҷи посбон

کیوان به حکم اوست برین برج پاسبان

Баҳром аз амр ӯст барин балъаи кўтўол

بهرام از امر اوست برین بلعه کوتوال

эй қасри кибриёии ту маҳфӯз аз инҳидом

ای قصر کبریای تو محفوظ از انهدام

Ваии малик бе заволи ту мҳрўс аз интиқол

وی مُلک بی‌زوال تو محروس از انتقال

Ваии бӯстони лутфи ту бе всмти збўл

وی بوستان لطف تو بی وصمت ذبول

Ваии офтоби лутфи ту бе нисбати завол

وی آفتاب لطف تو بی نسبت زوال

Айвони ваҳдати ту мубарро аз инҳитот

ایوان وحدت تو مبرّا از انحطاط

Ва арқони қудрати ту мъро аз ихтилол

و ارکان قدرت تو معرّا از اختلال

Бишкаста дар қафои ту шаҳбози ақли пар

بشکسته در قفای تو شهباز عقل پر

Ва афканда дар ҳавои ту симурғ ва ҳам бол

و افکنده در هوای تو سیمرغ وهم بال

Бар дӯши рӯзи ховарӣ аз шаб фиканда зулф

بر دوش روز خاوری از شب فکنده زلف

Бар рӯй субҳи машриқӣ аз шом карда хол

بر روی صبح مشرقی از شام کرده خال

Ваҳм аз сродқоти ҷалол ту қосираст

وهم از سرادقات جلال تو قاصرست

Вари ақли раҳи барад ба ту набӯд ба ҷузи хаёл

ور عقل ره برد به تو نبود به جز خیال

Хоҷугар илтимоси азин дар кунад равост

خواجو گر التماس ازین در کند رواست

Аз Подшаҳи иҷобат ва аз бандагони савол

از پادشه اجابت و از بندگان سؤال