Мавсим идаст ва мо навмед аз дидори ёр

موسم عید است و ما نومید از دیدار یار

Олимӣ дар айшу нӯш ва моу чашми ашкбор

عالمی در عیش و نوش و ما و چشم اشکبار

Ҳар касе бо ёр дар гашт гулистонаст ва ман

هر کسی با یار در گشت گلستان است و من

Зошк сурхам шуд канор аз доғи ҳиҷрони лолаи зор

زاشک سرخم شد کنار از داغ هجران لاله زار

Ҷони нисори мақдам ҷонон накарда , дам ба дам

جان نثار مقدم جانان نکرده، دم به دم

Чист баҳра аз тафарруҷгоҳи баҳси ҷони нисор

چیست بهره از تفرجگاه بحث جان نثار

Бенавоу дили пар аз хору ғарибу дардманд

بینوا و دل پر از خار و غریب و دردمند

Даст бар дил , сар ба зону , чашм дар раҳ , дили фигор

دست بر دل، سر به زانو، چشم در ره، دل فگار

Синаи сӯзон , дили фурӯзон , кӯчаи кӯча дар ба дар

سینه سوزان، دل فروزان، کوچه کوچه در به در

Каси мабодои ҳамчуи ман овора аз ёру диёр

کس مبادا همچو من آواره از یار و دیار

Бикра ҷўӣӣ шуд з ҳар чашмами равон аз хӯни дил

بکره جوئی شد ز هر چشمم روان از خون دل

Оқибат кардам давои доғи фироқи сари чанор

عاقبت کردم دوا داغ فراغ سر چنار

Холдогар нестии девонаи саҳрои навард

خالدا گر نیستی دیوانه صحرا نورد

Ту куҷоу кобулу ғазнӣну хоки Қандаҳор

تو کجا و کابل و غزنین و خاک قندهار