Машшотаи сари зулф ту бибаред ба бозӣ

مشاطّه سر زلف تو ببرید به بازی

То беш ба мардум накунад дасти дарозӣ

تا بیش به مردم نکند دست درازی

Гуҳи гуҳ ба ниёзи дили ушшоқ назар кун

گه گه به نیاز دل عشاق نظر کن

эй сарви биҳиштӣ ки саросари ҳамаи нозӣ

ای سرو بهشتی که سراسر همه نازی

Чун чанг ниҳодем ба пешати сари таслим

چون چنگ نهادیم به پیشت سرِ تسلیم

Мухтори тўӣӣ гар бизанӣ гар нанавозӣ

مختار توئی گر بزنی گر ننوازی

То рӯй ибодат наниҳад пеши ту зоҳид

تا روی عبادت ننهد پیش تو زاهد

Дар мазҳаби риндон суханаш нест намозӣ

در مذهب رندان سخنش نیست نمازی

эй қанд чаҳ дории сари даъвии латофат

ای قند چه داری سرِ دعوی لطافت

Тарсам ки лабаши бинӣ ва аз шарми гудозӣ

ترسم که لبش بینی و از شرم گدازی

Хоҳӣ ки барории нафаси гарм чу миҷмар

خواهی که برآری نفس گرم چو مجمر

Шартаст ки бо сӯзи дил хеш бисозӣ

شرط است که با سوز دل خویش بسازی

Ҳарчанд ки ояд дар ашки ту хаёлӣ

هرچند که آید دُرِ اشک تو خیالی

Аз дидаи маронаш ки ятемии сети ниёзӣ

از دیده مرانش که یتیمی ست نیازی