Гар ту дили мо сӯхтӣ аз оташи даврӣ

گر تو دل ما سوختی از آتش دوری

Мо бе ту ба дил бар наздем оби сабурӣ

ما بی تو به دل بر نزدیم آب صبوری

Ҳар чанд ки давр аз ту чу Фарҳод фитодем

هر چند که دور از تو چو فرهاد فتادیم

Чун санги дилон дил наниҳодем ба даврӣ

چون سنگ‌دلان دل ننهادیم به دوری

Донам нахурӣ ғами зи ҳалоки ман ранҷур

دانم نخوری غم ز هلاک من رنجور

Дар мотам булбул нанишинад гули сӯрӣ

در ماتم بلبل ننشیند گل سوری

То бо туам аз равза наяндешам ва аз ҳур

تا با توام از روضه نیندیشم و از حور

Ҳар ҷои нўнии он равза хулдаст ва ту ҳурӣ

هر جا نونی آن روضه خلدست و تو حوری

Сӯфӣ агарат рӯй дар он ғамза ва абрӯаст

صوفی اگرت روی در آن غمزه و ابروست

Пайваста ба миҳробӣ ва дар айни ҳузурӣ

پیوسته به محرابی و در عین حضوری

Хубон ки ба чашми ҳамаи маҳбӯби намоянд

خوبان که به چشم همه محبوب نمایند

Эшон ҳама чашманд ки бенанд ва ту нурӣ

ایشان همه چشمند که بینند و تو نوری

Гар бе ту сабураст камоли ин гунаҳӣ нест

گر بی تو صبور است کمال این گنهی نیست

Ин нукта зарурӣаст ки сабраст зарурӣ

این نکته ضروریست که صبرست ضروری