Ҳар нир ки бар синаам он фитнагар андохт
هر تیر که بر سینهام آن فتنهگر انداخت
Дил шҳл гирифт он ҳама чун бар сипари андохт
دل سهل گرفت آن همه چون بر سپر انداخت
Длхтаҳ нашуд ошиқ аз он ниру нёзрд
دلخسته نشد عاشق از آن تیر و نیازرد
Длхтаҳ аз он шуд ки ба рӯз дигар андохт
دلخسته از آن شد که به روز دگر انداخت
Зони нир ки андохт касе давр ба даъвӣ
زآن تیر که انداخت کسی دور به دعوی
Моро зи худ он шӯх аз он давртар андохт
ما را ز خود آن شوخ از آن دورتر انداخت
Боз омад ва бар нир дигар чашм дигар дӯхт
باز آمد و بر تیر دگر چشم دگر دوخت
Ҳар сайд ки он ғамза ба тири назари андохт
هر صید که آن غمزه به تیر نظر انداخت
То мурғ чаро басти пари хеш бар он тир
تا مرغ چرا بست پر خویش بر آن تیر
Мурғи дилам аз ҳасрати он болу пари андохт
مرغ دلم از حسرت آن بال و پر انداخت
Ошиқ ба ду сад захм чу қонеъ нашуд аз ёр
عاشق به دو صد زخم چو قانع نشد از یار
Як нир чаҳ бошад сӯии борон агар андохт
یک تیر چه باشد سوی باران اگر انداخت
На?бирт ба дили риш камол омад ва гум шуд
تیرت به دل ریش کمال آمد و گم شد
Хоҳӣ ки шавад бофта бояд дигар андохт
خواهی که شود بافته باید دگر انداخت