Бутӣ ҳар рӯз бар дили мейри созам

بتی هر روز بر دل میر سازم

Ба хӯрдани хӯни худро тири созам

به خوردن خون خود را تیر سازم

Тании перами гирифтори ҷавонон

تنی پیرم گرفتار جوانان

Бад-ӣни тифлӣ чаҳ худро пери созам ?

بدین طفلی چه خود را پیر سازم؟

Дил пора наёрам дӯхт ҳар чанд

دل پاره نیارم دوخت هر چند

Раги ҷони риштаи тадбири созам

رگ جان رشته تدبیر سازم

Чу кофурӣ нахоҳад гашти рӯзам

چو کافوری نخواهد گشت روزم

Зарурат бо шаб чун қӣри созам

ضرورت با شب چون قیر سازم

На пой онкӣ бигурезам зи тақдир

نه پای آنکه بگریزم ز تقدیر

Ҳамон беҳтар ки бо тақдири созам

همان بهتر که با تقدیر سازم

Надорам чун ба ҳоли сидқ то кӣ

ندارم چون به حال صدق تا کی

зи зуҳди ойӣнаи тазвири созам

ز زهد آیینه تزویر سازم

Бас аз беҳудаи гуфтан , хусрав , он ба

بس از بیهوده گفتن، خسرو، آن به

Ҳамаи қӯти ту мурғи анҷӣри созам

همه قوت تو مرغ انجیر سازم