Сабо , гардӣ азон зулфи ду то хост

صبا، گردی ازان زلف دو تا خاست

Ба ҳар сӯи бӯе аз машк хто хост

به هر سو بویی از مشک ختا خاست

Балои хуфтаи сари бардошт , гӯйӣ

بلای خفته سر برداشت، گویی

Марои мӯе казон зулфи ду то хост

مرا مویی کزان زلف دو تا خاست

Гиребон май дирам ҳар субҳ чун гул

گریبان می درم هر صبح چون گل

Ҳамаи расвои ман аз сабо хост

همه رسوایی من از صبا خاست

Назарҳо аз зкўаҳ ҳасан ме дод

نظرها از زکوة حسن می داد

з ҳам афтод каз ҳар сӯ гадо хост

ز هم افتاد کز هر سو گدا خاست

Матоъи ақлу ҷону дили ҳамаи сӯхт

متاع عقل و جان و دل همه سوخت

Ман ин оташ надонам каз куҷо хост

من این آتش ندانم کز کجا خاست

Ту тори зулфи бастии банд дар банд

تو تار زلف بستی بند در بند

з ҳар бандии марои дардӣ ҷудо хост

ز هر بندی مرا دردی جدا خاست

Умедам буд каз дасташ барам ҷон

امیدم بود کز دستش برم جان

Валикини хати мишкӣнаш бало хост

ولیکن خط مشکینش بلا خاست

Кунун моу лаби лаълу хати сабз

کنون ما و لب لعل و خط سبز

Ки тақворо рақам аз кор мо хост

که تقوی را رقم از کار ما خاست

Тамошоро биёи зини сӯии борӣ

تماشا را بیا زین سوی باری

Кунун каз гиряи хусрав гё хост

کنون کز گریه خسرو گیا خاست