Рухи хубат ба чаҳ монад , ба гулистону баҳорӣ

رخ خوبت به چه ماند، به گلستان و بهاری

Чашми маст ту бидон наргиси раънои хуморӣ

چشم مست تو بدان نرگس رعنای خماری

Май рӯй дар раҳ ва мегардад ҷони гирди сари ту

می روی در ره و می گردد جان گرد سر تو

Ҳам бидон гӯна ки гирди сар гул бошад хорӣ

هم بدان گونه که گرد سر گل باشد خاری

Теғ бигзор ки бории ҳақ ишқат бигзорам

تیغ بگذار که باری حق عشقت بگذارم

Гар на онии ту ки бо мо ҳақ суҳбат бигзорӣ

گر نه آنی تو که با ما حق صحبت بگذاری

Биҳдаҳи сети ин ки сари кӯии ту борони ду чашмам

بیهده ست این که سر کوی تو باران دو چشمم

Каз вафо хӯша наёбам ки ту ин тухми бакорӣ

کز وفا خوشه نیابم که تو این تخم بکاری

Шодмонам ба ғаматгар чаҳ дили сӯхта хӯн шуд

شادمانم به غمت گر چه دل سوخته خون شد

Шоди бодои дили тугар чаҳ зи мо ёд наёрӣ

شاد بادا دل تو گر چه ز ما یاد نیاری

Сайди он чашм шудам , гар кашадам нест маломат

صید آن چشم شدم، گر کشدم نیست ملامت

Гар биҷӯянди зи таркони дяти хӯни шикорӣ

گر بجویند ز ترکان دیت خون شکاری

эй хаёли рухи он ёри ҷдомондаҳи дарин дил

ای خیال رخ آن یار جدامانده درین دل

ӯ чун меҳмон нарасад , хона ба сӯрат чаҳ нигорӣ ?

او چون مهمان نرسد، خانه به صورت چه نگاری؟

эй ки бе фоидаи пандами диҳӣ , он рӯй надида

ای که بی فایده پندم دهی، آن روی ندیده

Гар бибиняш ту ҳам гӯш ба он панди надорӣ

گر ببینیش تو هم گوش به آن پند نداری

Обгинаи сети дили нозук бе тоқати хусрав

آبگینه ست دل نازک بی طاقت خسرو

Бишиканад ваа ки чунингар ту з дастат бигзорӣ

بشکند وه که چنین گر تو ز دستت بگذاری