Ситамӣ каз ту кашад мард , ситам натавон гуфт

ستمی کز تو کشد مرد، ستم نتوان گفت

Номи бедоди ту ҷузи лутф ва карам натавон гуфт

نام بیداد تو جز لطف و کرم نتوان گفت

Орзӯии ту з рӯй дгарон кам нашавад

آرزوی تو ز روی دگران کم نشود

Ҳоҷати каъба ба дидор ҳарам натавон гуфт

حاجت کعبه به دیدار حرم نتوان گفت

Ҳасани ту хонаи барандози мслмононст

حسن تو خانه برانداز مسلمانانست

Нози ҳам ёрбу зинҳор ки кам натавон гуфт

ناز هم یارب و زنهار که کم نتوان گفت

То чаҳ сарҳои азизон ба дарат хок шудаи сет

تا چه سرهای عزیزان به درت خاک شده ست

Ваа ки он хоки қадами хок қадам натавон гуфт

وه که آن خاک قدم خاک قدم نتوان گفت

Рашкам ояд ки барам номи ту пеши дгарон

رشکم آید که برم نام تو پیش دگران

Зикри инсофи ту дар пеши ту ҳам натавон гуфт

ذکر انصاف تو در پیش تو هم نتوان گفت

Чун манӣ бояд то бовараш ояд ғами ман

چون منی باید تا باورش آید غم من

Ту ки девонау мастӣ ба ту ғам натавон гуфт

تو که دیوانه و مستی به تو غم نتوان گفت

Сухани тавба ва онгаҳ зи ҷамоли хубон

سخن توبه و آنگه ز جمال خوبان

Ба ки доданд сари зер илм натавон гуфт

به که دادند سر زیر علم نتوان گفت

Қорӣӣ аз паии дайни брҳмниро май кишт

قاریی از پی دین برهمنی را می کشت

Гуфт аз баҳри сиррии тарк санам натавон гуфт

گفت از بهر سری ترک صنم نتوان گفت

Хсрўо гар кашадат ёр , магӯ кин ситам аст

خسروا گر کشدت یار، مگو کاین ستم است

Адли хубонро ба беҳуда ситам натавон гуфт

عدل خوبان را به بیهوده ستم نتوان گفت