Бахт чун бар нақди давлати сикка иқбол зад
بخت چون بر نقد دولت سکهٔ اقبال زد
Ҳам шаби шоҳӣ дар дарвеши фаррух фол зад
هم شب شاهی در درویش فرخ فال زد
Ҷисм хокӣ шуд сапанду бистари оташи он замон
جسم خاکی شد سپند و بستر آتش آن زمان
Кони гарони тамкин дар ин музтариб аҳвол зад
کان گران تمکین در این مضطرب احوال زد
Тоири гарми ошёни хоб аз ваҳшат парид
طایر گرم آشیان خواب از وحشت پرید
Фитнаи тирӣ аз камӣн бар мурғ Форғбол зад
فتنه تیری از کمین بر مرغ فارغبال زد
Соқии давлат ба дастами соғарии пар файз дод
ساقی دولت به دستم ساغری پر فیض داد
Мутриби ъушрат ба гӯшами нағмаи пар хол зад
مطرب عشرت به گوشم نغمهٔ پر خال زد
Он ки май кишташи хумори ҳиҷр дар кунҷи малол
آن که میکشتش خمار هجر در کنج ملال
Аз шароби васли соғарҳои моломол зад
از شراب وصل ساغرهای مالامال زد
Пеш аз он коед ба иқболи он шаҳи иқлӣми ҳасан
پیش از آن کاید به اقبال آن شه اقلیم حسن
Ҷонам аз тани хаймаи беруни баҳр истиқбол зад
جانم از تن خیمه بیرون بهر استقبال زد
Муҳташам зад бар сипоҳи ғами шабихуни шоҳи васл
محتشم زد بر سپاه غم شبیخون شاه وصل
Бар ба малики дили зи ъушрати хайма иҷлол зад
بر به ملک دل ز عشرت خیمهٔ اجلال زد