То ба сари манзил чашмам кунӣ эй сарви гузор
تا به سر منزل چشمم کنی ای سرو گذار
Ашк ман мекунад ин хона ба сад ранг нигор
اشک من میکند این خانه به صد رنگ نگار
Танги дил то нашӯй дар дил тангам заду чашм
تنگ دل تا نشوی در دل تنگم ز دو چشم
Ғурфаҳо сохтаам баҳри ту аз гӯшаи канор
غرفهها ساختهام بهر تو از گوشه کنار
Гар кунӣ сайри кунон рӯй басӯрат хона
گر کنی سیر کنان روی به صورتخانه
Сӯрат чин кунад аз шарми ту рӯ бар девор
صورت چین کند از شرم تو رو بر دیوار
Покаш аз дидаи ғайр ва ба дилами сози мақом
پاکش از دیدهٔ غیر و به دلم ساز مقام
Ки дар ӯ мардум бегона надоранд қарор
که در او مردم بیگانه ندارند قرار
Ршг бар шоҳ нишин дил ман дорад хулд
رشگ بر شاه نشین دل من دارد خلد
Ки дар ӯ ҳўрўшӣ чун ту гирифтаст қарор
که در او حوروشی چون تو گرفتهست قرار
Матлаъ меҳр шавад кулбаи торикам агар
مطلع مهر شود کلبهٔ تاریکم اگر
Аз ҷамоли ту бар ӯ акс фитад дар шаби тор
از جمال تو بر او عکس فتد در شب تار
Боди кохи дилу ҷони манзилу кошонаи ту
باد کاخ دل و جان منزل و کاشانهٔ تو
То замонӣ ки з офоқ намонад осор
تا زمانی که ز آفاق نماند آثار
Гар ба танагии зи дили тираи всоқ ту кунам
گر به تنگی ز دل تیره وثاق تو کنم
Чашми намнок ки аз ғайр дарав нест ғубор
چشم نمناک که از غیر درو نیست غبار
По нае бут ба сарои пардаи чашмами зи карам
پا نه ای بت به سراپردهٔ چشمم ز کرم
То кунам бар қидмати сад дар як донаи нисор
تا کنم بر قدمت صد دُر یکدانه نثار
Муҳташам кушта онаст ки дар кулбаи худ
محتشم کشته آنست که در کلبهٔ خود
Шамъ маҷлис кунадат эй маи хуршеди изор
شمع مجلس کندت ای مه خورشید عذار