Бас ки чашми имшаб ба чашми ишваи созиши доштам
بس که چشم امشب به چشم عشوهسازش داشتم
Аз нигаҳ кардани басӯии ғайри бозаши доштам
از نگه کردن بسوی غیر بازش داشتم
Ғайри ҷузи тири тағофул аз камон ӯ нахурд
غیر جز تیر تغافل از کمان او نخورد
Бас ки поси ғамзаи мардуми навозиши доштам
بس که پاس غمزهٔ مردم نوازش داشتم
То ба қасди ним нозӣ нанигарад сӯии рақиб
تا به قصد نیم نازی ننگرد سوی رقیب
Гӯшаи чашмӣ ба чашми ним нозаши доштам
گوشه چشمی به چشم نیم نازش داشتم
Гашти рози ман аёни бас каз ашороти ниҳон
گشت راز من عیان بس کز اشارات نهان
Бо рақибон дар мақоми эҳтирозаши доштам
با رقیبان در مقام احترازش داشتم
Дошт ӯ мустағнӣам аз нози дигари маҳвашон
داشت او مستغنیم از ناز دیگر مهوشان
Аз ниёзи ғайри ман ҳам бе ниёзаши доштам
از نیاز غیر من هم بینیازش داشتم
Зӯри ишқами байн ки тозон май гузашти он шаҳсавор
زور عشقم بین که تازان میگذشت آن شهسوار
Аз кашишҳои каманди шавқи бозаши доштам
از کششهای کمند شوق بازش داشتم
Бо хаёлаши муҳташам дар дасти бозӣ буд ва ман
با خیالش محتشم در دست بازی بود و من
Даст дар занҷир аз зулфи дарозаши доштам
دست در زنجیر از زلف درازش داشتم