Чу натавонам ба мардуми қиссаи он бевафо гӯям

چو نتوانم به مردم قصه آن بی‌وفا گویم

Шубони гуҳ бо мау анҷуми саҳари гуҳ бо сабо гӯям

شبان گه با مه و انجم سحر گه با صبا گویم

Шабӣ каз давряш гӯям ҳикоят бо дили маҳзун

شبی کز دوریش گویم حکایت با دل محزون

Ба охир чун шавад наздики боз аз ибтидо гӯям

به آخر چون شود نزدیک باز از ابتدا گویم

з пешат нагузарам танҳо ки тарсам чун марои бинӣ

ز پیشت نگذرم تنها که ترسم چون مرا بینی

Шӯии дарҳам ки ногуҳ бо ту ҳарф ошно гӯям

شوی درهم که ناگه با تو حرف آشنا گویم

Ба ман Лутфӣ ки дай дар роҳ кард охир пушаймон шуд

به من لطفی که دی در راه کرد آخر پشیمان شد

Ки ногуҳи ман рӯм аз роҳу пеши ғайр во гӯям

که ناگه من روم از راه و پیش غیر وا گویم

Насими зулфи парчини ту май арзад ба малики чин

نسیم زلف پرچین تو می‌ارزد به ملک چین

Агар зулфи туро машк хато гӯям

اگر زلف تو را مشک ختا گویم، خطا گویم

Ба ангези рақибони муҳташамро дод дашномӣ

به انگیز رقیبان محتشم را داد دشنامی

Маро то ҳаст ҷон дар тани рақибонро дуо гӯям

مرا تا هست جان در تن رقیبان را دعا گویم