Махон зи дайрам ба каъбаи зоҳид ки барда аз кафи дили ман онҷо

مخوان ز دیرم به کعبه زاهد که برده از کف دل من آنجا

Ба нолаи мутриб ба ишваи соқӣ ба хандаи соғар ба гиряи мино

به ناله مطرب به عشوه ساقی به خنده ساغر به گریه مینا

Ба ақли нозии ҳаким то кӣ ба фикрати ин раҳ намешавад тай

به عقل نازی حکیم تا کی به فکرت این ره نمی‌شود طی

Ба канаи зотши хиради баради пай агар расад хас ба қаъри дарё

به کنه ذاتش خرد برد پی اگر رسد خس به قعر دریا

Чу нест бениш ба дидаи дили рух ар намояди ҳақат чаҳ ҳосил

چو نیست بینش به دیده دل رخ ار نماید حقت چه حاصل

Ки ҳаст яксон ба чашми кӯрон чаҳ нақши пинҳон чаҳ ошкоро

که هست یکسان به چشم کوران چه نقش پنهان چه آشکارا

Чу нест қудрат ба айш ва мастӣ бисоз эй дил ба тангдастӣ

چو نیست قدرت به عیش و مستی بساز ای دل به تنگدستی

Чу қисмат ин шуд з хон ҳастӣ дигар чаҳ хезади зи саъии биҷо

چو قسمت این شد ز خوان هستی دگر چه خیزد ز سعی بیجا

Рабӯдаи Меҳрӣ чу зарраи тобами зи офтобӣ дар изтиробам

ربوده مهری چو ذره تابم ز آفتابی در اضطرابم

Кигар фурӯғаш ба кӯҳи тобади з бе қарории даройад аз по

که گر فروغش به کوه تابد ز بی‌قراری درآید از پا

Дар ин биёбони з нотавонӣ фитодам аз пои чунонкии доне

در این بیابان ز ناتوانی فتادم از پا چنانکه دانی

Сабои паёмии зи меҳрбонии бабри зи маҷнӯн ба сӯии Лайло

صبا پیامی ز مهربانی ببر ز مجنون به سوی لیلا

Ҳамин на муштоқ дар орзӯят мудом гирад суроғи Кувайт

همین نه مشتاق در آرزویت مدام گیرد سراغ کویت

Тамоми олам ба ҷустуҷӯят ба каъбаи муъмин ба дайри тарсо

تمام عالم به جستجویت به کعبه مومن به دیر ترسا

Хониш
шморҳ 1 — дрӣо қлӣлӣ