Чаҳ шавад ки аҳли ҷаҳон ба касе зи туфи ғам ӯ шарарӣ нарасад

چه شود که اهل جهان به کسی ز تف غم او شرری نرسد

Ки ба сӯзи дили пар аз оташ мо расад ӯ ҷуз ӯ дгарӣ нарасад

که به سوز دل پر از آتش ما رسد او جز او دگری نرسد

Нарӯм ба чаҳ сони зи вилояти ту зи ҷафои буруни зи ниҳояти ту

نروم به چه سان ز ولایت تو ز جفای برون ز نهایت تو

Ки зи гӯшаи чашми анояти ту ман ғмздаҳро назарӣ нарасад

که ز گوشه چشم عنایت تو من غمزده را نظری نرسد

Ба ҳдиқаҳи васли ту перу ҷавони ҳамаро шудаи хӯни зи ду дидаи равон

به حَدیقه وصل تو پیر و جوان همه را شده خون ز دو دیده روان

Ки дарахт пурсамараст ва аз он ба смртлбон самарӣ нарасад

که درخت پرثمر است و از آن به ثمرطلبان ثمری نرسد

На ба нолаам аз ситамат бар кас на ба бодияам ба Фқон чу ҷарас

نه به ناله‌ام از ستمت بر کس نه به بادیه‌ام به فقان چو جرس

Ман хастаи ғамат ба ту гӯяму бас ки ба дарди дилам дгарӣ нарасад

من خسته غمت به تو گویم و بس که به درد دلم دگری نرسد

Шудаи қисмати мо чу фусурдаи дилони хунакии зи бас аз дами сарди ҷаҳон

شده قسمت ما چو فسرده‌دلان خنکی ز بس از دم سرد جهان

Шавад оташ ар ҳамаи куну макон ба самандарӣ шарарӣ нарасад

شود آتش ار همه کون و مکان به سمندری شرری نرسد

Ту ки ҷаври ту омада бар дили мо ҳамаи роҳат ҷон набӯд аҷабӣ

تو که جور تو آمده بر دل ما همه راحت جان نبود عجبی

Ки расад паии ҳам зи ту санги ҷафо ва ба шишаи мо хатарӣ нарасад

که رسد پی هم ز تو سنگ جفا و به شیشه ما خطری نرسد