Домани хеши зи хӯни мижа гулшан кардам

دامن خویش ز خون مژه گلشن کردم

Аз фироқи ту чаҳ гулҳо ки бдомн кардам

از فراق تو چه گل‌ها که بدامن کردم

Шуд кафан дӯхтам он ҷома ки аз тори вафо

شد کفن دوختم آن جامه که از تار وفا

Сияҳи онрўз ки ин ришта бсўзн кардам

سیه آنروز که این رشته بسوزن کردم

Гуфтам аз ишқ фурӯғӣ расадам оҳ ки шуд

گفتم از عشق فروغی رسدم آه که شد

Тиратар рӯзам аз ин шамъ ки равшан кардам

تیره‌تر روزم از این شمع که روشن کردم

Равған дида гирифтам зи сиришки гулгун

روغن دیده گرفتم ز سرشک گلگون

Бчроғўни шаби ҳиҷри ту равшан кардам

بچراغون شب هجر تو روشن کردم

Охирам дӯст нагаштӣ туу доғам ки тамом

آخرم دوست نگشتی تو و داغم که تمام

Дўстонрои бахуд аз баҳри ту душман кардам

دوستانرا بخود از بهر تو دشمن کردم

Кардам аз дайру ҳарами рӯи бадари дили худ ро

کردم از دیر و حرم رو بدر دل خود را

Фориғ аз пайравии шайх ва брҳмн кардам

فارغ از پیروی شیخ و برهمن کردم

Қисмати барқ чаҳ хоҳад шуд охири гирам

قسمت برق چه خواهد شد آخر گیرم

Сабз шуд куштааму чидам ва хирман кардам

سبز شد کشته‌ام و چیدم و خرمن کردم

Рехтам дар раҳи ишқи ончии маро буд бхок

ریختم در ره عشق آنچه مرا بود بخاک

Хешро фориғ аз андеша раҳзан кардам

خویش را فارغ از اندیشه رهزن کردم

Чун ҷарас аз дил ҳар санг барояд фарёд

چون جرس از دل هر سنگ برآید فریاد

Бскаҳ дар бодияи ишқи ту шеван кардам

بسکه در بادیه عشق تو شیون کردم

Нарасм дар раҳи мақсӯди бҷоӣии муштоқ

نرسم در ره مقصود بجائی مشتاق

Кончаҳи пер хирадам гуфт макун ман кардам

کانچه پیر خردم گفت مکن من کردم