Рафтӣ ту зи базм ва на ҳамин нашъа з ме рафт
رفتی تو ز بزم و نه همین نشئه ز می رفت
Таъсири зи овози дафу нола не рафт
تأثیر ز آواز دف و ناله نی رفت
Ман бихўди шавқами барраи ваъда чаҳ донам
من بیخود شوقم بره وعده چه دانم
Қосиди зи сари кӯии ту кӣ омад ва кӣ рафт
قاصد ز سر کوی تو کی آمد و کی رفت
Чун ғунчаи дилами воншўд бе ту гирифтам
چون غنچه دلم وانشود بی تو گرفتم
Сад фасл баҳор омад ва сад мавсим дай рафт
صد فصل بهار آمد و صد موسم دی رفت
Хӯнии ту ки дар базм бадал кардем аз ноз
خونی تو که در بزم بدل کردیم از ناز
Рафтӣу зи чашмами ҳама чун шиша ме рафт
رفتی و ز چشمم همه چون شیشه می رفت
Ёр омад ва сад шикваи бадали доштам аз вай
یار آمد و صد شکوه بدل داشتم از وی
Рафтам чу кунам сари гилае вой ки вай рафт
رفتم چو کنم سر گلهای وای که وی رفت
Рафт аз барам он срўсҳии вази дилу ҷонам
رفت از برم آن سروسهی وز دل و جانم
Сад оҳи зи дунболаш ва сад нолаи з пай рафт
صد آه ز دنبالش و صد ناله ز پی رفت
Фарёд ки бахташ нарасонид ба Лайлӣ
فریاد که بختش نرسانید به لیلی
Маҷнӯн агар аз бодияи сад бор бҳӣ рафт
مجنون اگر از بادیه صد بار بحی رفت
Нолон нашӯй то зи фироқии ту чаҳ доне
نالان نشوی تا ز فراقی تو چه دانی
Каз дарди ҷдоӣии Нитсаатон чаҳ ба не рафт
کز درد جدائی نیستان چه به نی رفت
Кардем зи хок дару нақши қидмати ёд
کردیم ز خاک در و نقش قدمت یاد
Ҳарҷо сухан аз тахти ҷаму афсар кӣ рафт
هرجا سخن از تخت جم و افسر کی رفت
Муштоқ ки омад бар ӯ шикваи кони дӯш
مشتاق که آمد بر او شکوه کان دوش
Чун гирди раҳи давру дарози гила тай рафт
چون گرد ره دور و دراز گله طی رفت