Насими субҳи паёмии расонад дар гӯшам

نسیم صبح پیامی رساند در گوشم

Ки шуд гули чамани интизори оғӯшам

که شد گل چمن انتظار آغوشم

Кадоми сарви маро дар канор ме ояд

کدام سرو مرا در کنار می آید

Чу боли фохта парвоз дорад оғӯшам

چو بال فاخته پرواز دارد آغوشم

Буд зи буии гулами кӯчаи боғҳо лабрез

بود ز بوی گلم کوچه باغها لبریز

Аз ин чаҳ суд ки гулчин кунад фаромӯшам

از این چه سود که گلچین کند فراموشم

Ба кӯии ишқи сбкрўтрми зи сояи хеш

به کوی عشق سبکروترم ز سایه خویش

Ба доманӣ нараседаст гирди попушам

به دامنی نرسیدست گرد پاپوشم

Ба дом бепар ва болӣ кашидаанд маро

به دام بی پر و بالی کشیده اند مرا

намекунанд раҳои он қадр ки ме кӯшам

نمی کنند رها آنقدر که می کوشم

Ҳазари зи тир маломат намекунам ҳаргиз

حذر ز تیر ملامت نمی کنم هرگز

Либоси пора ба бар дораму зираи пӯшам

لباس پاره به بر دارم و زره پوشم

Бурун з ҳастӣ худ сидо наме орем

برون ز هستی خود سیدا نمی آریم

Ки додааст марои доруе ки биҳушам

که داده است مرا دارویی که بیهوشم