Бардаи теғи абрӯяти об аз дами шамшерҳо

دیده را عمری به مردم آشنا کردم نشد

Захми кории хӯрдае мижгони шӯхати тирҳо

سینه را آئینه صدق و صفا کردم نشد

Пеши хатати ошиқонро кам шуда тадбирҳо

با بد و نیک جهان عهد و وفا کردم نشد

эй забун дар ҳалқаи занҷири зулфи шерҳо

در دل هر کس ز روی مهر جا کردم نشد

Сар ба саҳро дода ӣӣ зулфи хушати нахҷӣрҳо

خانه شادی به روی خویش وا کردم نشد

Миннати эҳсони гадо аз аҳл дунё ме кашад

مدتی چون سایه بودم در قفای شیخ و شاب

Соғар аз лаби тишнагии худро ба мино ме кашад

روزگاری همنشین بودم به مینای شراب

Оби софи тираро марказ ба дарё ме кашад

سر به تنهایی برآرم بعد ازین چون آفتاب

Гуфтугӯии куфру дайни охир ба якҷо ме кашад

پاس خاطر تا به کی دارم درین دیر خراب

Хоб як хобаст аммо мухталифи таъбирҳо

با قلندر شرب و با زاهد ریا کردم نشد

эй зи шарм оризат гардид дар гулшани гули об

مهربانی ها نمودم دوستان خویش را

Ғунча дорад аз лабати сар дар гиребони ҳиҷоб

باز با مدح و ثنا کردم زبان خویش را

Дар гулистонӣ ки бошад дидаи шабнам ба хоб

چون قلم گویم من اکنون داستان خویش را

намекунад боди сабо ҳар рӯзи пеш аз офтоб

خاک پای هر یک از همصحبتان خویش را

Дафтари ҳасани туро аз буии гули тафсирҳо

سالها در دیده خود توتیا کردم نشد

То маро афганда чашми пари хумораш аз назар

مجلس اغیار روشن کرده است آن می پرست

Нест ҳамчун шамъ дар олами марои пурвои сар

ای مسلمانان چه باید کرد با آن شوخ مست

Хат рӯй ёр шуд дар малики ҷонами рахна гар

در فراق زلف کافر کیش می خوردم شکست

Аз сари таъмирам эй Хизри мурувват дар гузар

آبروی رفته را می خواستم آرم به دست

Бар намедорад маро аз хоки ин таъмирҳо

در حریم کعبه چندانی دعا کردم نشد

Сидо аз гиря то кӣ даштро Ҷайҳун кунам

سیدا دارم دلی چون غنچه گل پر ز خون

Лолаи саҳрои ним домони худ пар хӯн кунам

کوکب بختم در آب افتاده طالع شد زبون

Кӣ тавонам бар сари худ хок чун маҷнӯн кунам

می روم زنجیر در پا در بیابان جنون

Ман кӣми соиб ки даст аз остин берун кунам

بس که ناکام از دل آفاق افتادم برون

Дар биёбоне ки нохун мегузорад шерҳо

قیمت خود را به نرخ خاک پا کردم نشد