Соқиои соғари дӯшинаи набард аз ҳушам

ساقیا ساغرِ دوشینه نَبُرد از هوشم

Бодаи пеши ор ки махмур дар шароби дӯшам

باده پیش آر که مخمور در شراب دوشم

Гар чунин ҷилваи намояди рухи гандум вааш ёр

گر چنین جلوه نماید رخِ گندم‌وَشِ یار

Ҳосили ?данеу уқбо ба ҷӯӣ нафурӯшам

حاصلِ دنیی و عقبی به جویی نفروشم

Инчунинам ки сари зулфи туе сомон кард

اینچنینم که سر زلف تویی سامان کرد

Охир аз Рӯсияӣ хона диҳад бар дӯшам

آخر از روسیهی خانه دهد بر دوشم

Гӯш пар карда марои замзамаи савти самоъ

گوش پر کرده مرا زمزمۀ صوت سماع

Хоҷаи маъзӯрам агар ҳарф дигар нниўшм

خواجه معذورم اگر حرف دگر ننیوشم

Гарчи донам сафари васли маро поён нест

گرچه دانم سفر وصل مرا پایان نیست

Лек то пой равиш ҳаст ба ҷон ме кӯшам

لیک تا پای روش هست به جان می‌کوشم

Гуфтугӯ нест маро бо ту бирав эй зоҳид

گفتگو نیست مرا با تو برو ای زاهد

Ҳар чаҳ хоҳии ту фурӯи гӯй ки ман хомӯшам

هر چه خواهی تو فرو گوی که من خاموشم

Соқӣ ар заҳр ба ҷоми ман длхўни резад

ساقی ار زهر به جامِ منِ دلخون ریزد

Ба фалак меравад овозаи нўшонўшм

به فلک می‌رود آوازهٔ نوشانوشم

Дорам ин хирқа ки дар зери кашами ҷоми шароб

دارم این خرقه که در زیر کشم جام شراب

Занни бдгўи набарди шайхи мураққаъи пӯшам

ظَنِّ بدگو نبرد شیخ مرقع‌پوشم

Ҷуз месоф намеоядам аз шишаи табъ

جز می صاف نمی‌آیدم از شیشهٔ طبع

Бас ки аз оташ рӯй ту чу хам дар ҷӯшам

بس که از آتش روی تو چو خم در جوشم

Соқиои бодаи ангур ба ҳушёрони даҳ

ساقیا بادهٔ انگور به هشیاران ده

Ки ман имшаби зи хаёли лаб ӯ мадҳушам

که من امشب ز خیال لب او مدهوشم

эй дили андари хами зулфаш чаҳ кашӣ нола хамӯш

ای دل اندر خم زلفش چه کشی ناله خموش

Фош шуд дар ҳамаи олами сухани сргўшм

فاش شد در همه عالم سخن سرگوشم

Ҳамаи дил май барад аз дасти ҳадиси нир

همه دل می‌برد از دست حدیث نیّر

То ҳадиси сари зулфи ту буд дар гӯшам

تا حدیثِ سرِ زلفِ تو بُوَد در گوشم