Дар васлам ва ба ҳиҷр барам рашки ғайр ро
در وصلم و به هجر برم رشک غیر را
Аз номае чу май шинавам ёд ме кунад
از نامهای چو میشنوم یاد میکند
Имрӯзи изтироб дигар дошт мурғи дил
امروز اضطراب دگر داشت مرغ دل
Сайёдаш аз қафаси магар озод ме кунад
صیادش از قفس مگر آزاد میکند