Сабӯҳи офати мағзу заъф дил аст

صبوح آفتِ مغز و ضعفِ دل است

Вале табъ бурно бидон моил аст

ولی طبعِ بُرنا بدان مایل است

Хуш ояд сабӯҳии трбнок ро

خوش آید صبوحی طربناک را

Хусусан ҷавонони чолок ро

خصوصا جوانانِ چالاک را

Дам субҳ дорад ҳавоӣ дигар

دم صبح دارد هوایی دگر

Мақомоти ихвони сафойӣ дигар

مقاماتِ اِخوان صفایی دگر

Ҳаме то барояд зи кӯҳи офтоб

همی تا برآید ز کوه آفتاب

Фурӯ шуд сармасти ҳоле ба хоб

فرو شد سرمست حالی به خواب

Агар бар сабӯҳӣ шавад бози рӯз

اگر بر صبوحی شود باز روز

Гаронӣ кунад маҷлис дил фурӯз

گرانی کند مجلس دل فروز