Мунтазири ҳудҳудам то зи сабо кӣ расад
منتظرِ هدهدم تا ز سبا کی رسد
Вази тарафи гули ситони пайки сабо кӣ расад
وز طرفِ گل سِتان پیکِ صبا کی رسد
Гарчи з ҳад шуд буруни муддати ҳиҷрон вале
گرچه ز حد شد برون مدّتِ هجران ولی
Даст ба сарвии чунон аз сари по кӣ расад
دست به سروی چنان از سرِ پا کی رسد
Гарна бурид сабо восита бошад дигар
گرنه بریدِ صبا واسطه باشد دگر
Буии арақи чини дӯст беш ба мо кӣ расад
بویِ عرق چینِ دوست بیش به ما کی رسد
Сабр кунам ҳолиё то зи табиби умед
صبر کنم حالیا تا ز طبیبِ امید
Чашми Ромади дидаро кашфи ғто кӣ расад
چشمِ رَمَد دیده را کشفِ غطا کی رسد
Аз дар ҳақи но умед бознагашта сети кас
از درِ حق نا امید بازنگشته ست کس
Ҳам бирасад бахши ман оре то кӣ расад
هم برسد بخشِ من آری تا کی رسد
Васвасаи интизор бетамаъӣ нест ҳам
وسوسۀ انتظار بی طمعی نیست هم
То ба сари вақти мо бахти куҷо кӣ расад
تا به سرِ وقتِ ما بخت کجا کی رسد
Машваратӣ бо хирад кардам ва гуфтам бигӯӣ
مشورتی با خرد کردم و گفتم بگوی
Васли фулонӣ ба ман аз ту ?ҳулло кӣ расад
وصلِ فلانی به من از تو هلا کی رسد
Гуфт нзорӣ хамӯш шефта рое макун
گفت نزاری خموش شیفته رایی مکن
Чашмаи ҳайвон ба ту сода дило кӣ расад
چشمۀ حیوان به تو ساده دلا کی رسد
Зон ки ту доне ва ман он чаҳ ту дории умед
زان که تو دانی و من آن چه تو داری امید
Шоҳ Сикандар наёфт пас ба гадо кӣ расад
شاه سکندر نیافت پس به گدا کی رسد
Гуфтамаш он ҷо ки ман май расми охири ҳазор
گفتمش آن جا که من می رسم آخر هزار
Ҳам чу Сикандар расад не ба худо кӣ расад
هم چو سکندر رسد نی به خدا کی رسد