Киро киштанд даии чашмони масташ

که را کشتند دی چشمانِ مستش

Ки ҳаст имрӯзи хӯни олӯдаи дасташ

که هست امروز خون آلوده دستش

Манам он куштаи ҳии бозгашта

منم آن کشتۀ حی بازگشته

Ба бӯсӣ аз лаби кавсари парастиш

به بوسی از لبِ کوثر پرستش

Дилии кӯ каз каманди зулф ӯ ҷуст

دلی کو کز کمندِ زلفِ او جست

Ки неи чашмаш ба тири ғамзаи хстш

که نی چشمش به تیرِ غمزه خستش

Агар зон даст симин ме фиристад

اگر زان دستِ سیمین می فرستد

Марои хуштар з нӯш ояд кбстш

مرا خوش تر ز نوش آید کبستش

Ҳилол аз баҳр он шуд моҳи гардун

هلال از بهرِ آن شد ماهِ گردون

Ки чун моҳии броўизд ба шасташ

که چون ماهی برآویزد به شستش

Ба акси қомати сарви сарафроз

به عکسِ قامتِ سروِ سرافراز

Қиёмат мекунад болои пасташ

قیامت می کند بالایِ پستش

Марои гӯйии Марв дар кӯии ёрӣ

مرا گویی مرو در کویِ یاری

Ки ҳар дам бо касе бошад нишасташ

که هر دم با کسی باشد نشستش

Чаҳ афтодӣ ба дасти гули изорӣ

چه افتادی به دستِ گل عذاری

Ки хорӣ аз ту дар домани нбстш

که خاری از تو در دامن نبستش

Маломат бар нзорӣ то кӣ охир

ملامت بر نزاری تا کی آخر

Раво набӯд макун чандини шикасташ

روا نبود مکن چندین شکستش

Нзорӣ аз касе бимӣ надорад

نزاری از کسی بیمی ندارد

Ба ғайр аз ғамзаи чашмони масташ

به غیر از غمزۀ چشمانِ مستش

Насиҳат бо касе гӯйанд кӯ ро

نصیحت با کسی گویند کو را

Ғами дунёу дайни як зарра ҳасташ

غمِ دنیا و دین یک ذرّه هستش