Дареғ каз назари дӯстони биФтодм
دریغ کز نظرِ دوستان بیفتادم
Ба ҳарзаи умри гиромӣ ба бод бар додам
به هرزه عمرِ گرامی به باد بر دادم
Дарин азоб ки бар ман аду бибахшоед
درین عذاب که بر من عدو ببخشاید
Касе намерасад аз дӯстон ба фарёдам
کسی نمی رسد از دوستان به فریادم
Хилофи ақл будгар нгўимш ки чаҳ бод
خلافِ عقل بود گر نگویمش که چه باد
Бар он замон ки ман аз модари ҷаҳони зодам
بر آن زمان که من از مادرِ جهان زادم
Бабрад дар гулу хоками замона то гардан
ببرد در گل و خاکم زمانه تا گردن
Чу сарви лоф чаро мезанад ки озодам
چو سرو لاف چرا می زند که آزادم
Ҷаҳони хурраму айёми айш боз омад
جهانِ خرّم و ایّامِ عیش باز آمد
Туро аз он чаҳ хабар гар кашад ба бе додам
تو را از آن چه خبر گر کشد به بی دادم
Ба ҳар чаман ки расидами зи хори мижгонам
به هر چمن که رسیدم ز خارِ مژگانم
зи рашки булбулу гули хӯни з чашм бикшодам
ز رشکِ بلبل و گل خون ز چشم بگشادم
Ба зери соя тўбо нишастаам чаҳ аҷаб
به زیرِ سایۀ طوبا نشسته ام چه عجب
Гар илтифот набошад ба сарву шамшодам
گر التفات نباشد به سرو و شمشادم
На барги он ки назар бар ҷамол ӯ фиканам
نه برگِ آن که نظر بر جمالِ او فکنم
На рӯй он ки лаби сабза дил кунад шодам
نه رویِ آن که لبِ سبزه دل کند شادم
Чу ғам параст шудам дили зи айш бар кунадам
چو غم پرست شدم دل ز عیش بر کندم
Чу ху пазир шудам дил ба ҷавр биниҳодам
چو خو پذیر شدم دل به جور بنهادم
Ҳавои мутрибу савдои бодау ғурбат
هوایِ مطرب و سودایِ باده و غربت
з сар бирафт чу номи нзорӣ аз ёдам
ز سر برفت چو نامِ نزاری از یادم