Шаби фироқ ки берағбатӣ сафар кардам

شبِ فراق که بی رغبتی سفر کردم

Набӯд фоида ҳар чанд ман ҳазар кардам

نبود فایده هر چند من حذر کردم

Ба ихтиёр накардам зи хизмати ту сафар

به اختیار نکردم ز خدمتِ تو سفر

Балии зарурати таклиф буд агар кардам

بلی ضرورتِ تکلیف بود اگر کردم

зи сӯзи сина ба ҳар манзилӣ ки бигузаштам

ز سوزِ سینه به هر منزلی که بگذشتم

Ба хӯни дили зи раҳи дидаи хок тар кардам

به خونِ دل ز رهِ دیده خاک تر کردم

Сазо бидод марои гӯши моли фурқати ту

سزا بداد مرا گوش مال فرقت تو

Ба як ду ҳафта ки аз хизматат сафар кардам

به یک دو هفته که از خدمتت سفر کردم

Дамии зи фикри ту холӣ набӯдаам валлоҳ

دمی ز فکرِ تو خالی نبوده ام والله

Гумон мабар ки магар бо ту дил дигар кардам

گمان مبر که مگر با تو دل دگر کردم

Сухан ба ном ту гуфтам агар сухан гуфтам

سخن به نامِ تو گفتم اگر سخن گفتم

Назар ба рӯй ту кардам агар назар кардам

نظر به رویِ تو کردم اگر نظر کردم

Сабо ба гирди ман андар муроҷиат нарасад

صبا به گردِ من اندر مراجعت نرسد

Саманди тавсани шавқи туро чу бар кардам

سمندِ توسنِ شوق ترا چو بر کردم

Ба захми тири маломат сипар наяндозам

به زخمِ تیرِ ملامت سپر نیندازم

Чу теғи сина ба пеши бало сипар кардам

چو تیغ سینه به پیش بلا سپر کردم

Кифоятаст ҷунуни марои маломати халқ

کفایت است جنونِ مرا ملامتِ خلق

Ки ман ба саъии маломати басӣ бтар кардам

که من به سعیِ ملامت بسی بتر کردم

Марои нзорӣ девона хону нанги мадор

مرا نزاریِ دیوانه خوان و ننگ مدار

Ки номи ақл ба девонагӣ смр кардам

که نامِ عقل به دیوانگی سمر کردم