Рӯзҳо шуд ки бирафтӣ ва ба хизмат нарасидам
روزها شد که برفتی و به خدمت نرسیدم
Ҳеҷ кофари мкшоди он чаҳ ман аз ҳиҷр кашидам
هیچ کافر مَکَشاد آن چه من از هجر کشیدم
Чаҳ нивисам ки чаҳ омад бар серум то ту бирафтӣ
چه نویسم که چه آمد به سرم تا تو برفتی
Чаҳ маломат ки набардам чаҳ қиёмат ки надидам
چه ملامت که نبردم، چه قیامت که ندیدم
Офтобии ту ва чун зарра сросимаҳ бимонадам
آفتابی تو و چون ذرّه سرآسیمه بماندم
Дар паии ?ути бас ки блоФоидаҳ чун сояи давидам
در پیات بس که بلافایده چون سایه دویدم
Дар кашидам зи ҳамаи халқи ҷаҳони сар ба хиҷолат
درکشیدم ز همه خلقِ جهان سر به خجالت
Ки ба даъвии зҳмаҳи халқи ҷаҳонати бгзидм
که به دعوی ز همه خلقِ جهانت بگزیدم
Лоҷарам ҳар ки ба ман мерасад ангушти маломат
لاجرم هر که به من میرسد انگشتِ ملامت
намекашад дар ман азин заҳри маломат ки чашидам
میکشد در من ازین زهرِ ملامت که چشیدم
Ҳам чунон дар серуми ошӯби таманноӣ висол аст
هم چنان در سرم آشوبِ تمنّایِ وصال است
То нагӯйӣ ки ба куллӣ зи ту умед буридам
تا نگویی که به کلّی ز تو امیّد بریدم
Меҳри дерина маҳоласт ки азҷон ба дар ояд
مِهرِ دیرینه محال است که از جان بهدرآید
Сухан муътабараст ин мисли аз ҳар ки шунидам
سخنِ معتبرست این مثل از هر که شنیدم
Ҳаргиз андеша накардам зи сари даст чу симат
هرگز اندیشه نکردم ز سرِ دستِ چو سیمت
Ки ба ғайрати сари ангушти таҳайюри нгзидм
که به غیرت سرِ انگشتِ تحیّر نگزیدم
Оқибат рафтӣ ва пайванд буридӣ зи нзорӣ
عاقبت رفتی و پیوند بریدی ز نزاری
Ман ҳам аз аввали аҳди охири ин кор бидидам
من هم از اوّلِ عهد، آخرِ این کار بدیدم