Шабӣ буд ба маии хилватӣ ки соз кунам
شبی بود به مهی خلوتی که ساز کنم
Хурӯс бонг кунад то нигоҳ боз кунам
خروس بانگ کند تا نگاه باز کنم
Рақиби душману қиссаи дарозу шаби кӯтоҳ
رقیب دشمن و قصه دراز و شب کوتاه
Маҷол нест ки бо дӯсти шарҳ роз кунам
مجال نیست که با دوست شرح راز کنم
Ба рӯзи мӯҳтасибони дофеъ ва ба шаби асасон
به روز محتسبان دافع و به شب عسسان
зи ҳеҷ сӯи нҳлндм ки сарфароз кунам
ز هیچ سو نهلندم که سرفراز کنم
Ба тавбаи бози мхўонидм эй мусулмонон
به توبه باز مخوانیدم ای مسلمانان
Ки марди зуҳди ним тавба бар муҷоз кунам
که مرد زهد نیم توبه بر مجاز کنم
Асар кунад нафас ошиқон бипарҳезед
اثر کند نفس عاشقان بپرهیزید
зи нола ӣ саҳарӣ каз сар ниёз кунам
ز ناله ی سحری کز سر نیاز کنم
Чу бод мегузарад умри хок бар сари ман
چو باد می گذرد عمر خاک بر سر من
Ки мангар оташам аз дӯст эҳтироз кунам
که من گر آتشم از دوست احتراز کنم
Ба эътиқоди нзорӣ чу дӯст хушнӯдаст
به اعتقاد نزاری چو دوست خشنودست
Гунаҳ набошад агар пеши бут намоз кунам
گنه نباشد اگر پیش بت نماز کنم