Даврами дареғи мавсими ъушрати зи дӯстон
دورم دریغ موسمِ عشرت ز دوستان
Наздик шуд ки боз шавад тозаи бӯстон
نزدیک شد که باز شود تازه بوستان
Ёрам намехӯрд ғами ман ҳеҷ ва ман ҳама
یارم نمی خورد غم من هیچ و من همه
Хӯн мехӯрам ба ҷой меохир накӯаст он
خون می¬خورم به جای مِی آخر نکوست آن
Ҳаргиз надошт бе гиреҳи кӣнаи абрувон
هرگز نداشت بی گره کینه ابروان
Субҳонаи таъолии охир чаҳ хуаст он
سبحانه تعالی آخر چه خوست آن
эй рашки офтоби ҷаҳони тоб рӯй ту
ای رشکِ آفتابِ جهان تاب روی تو
ё раб чаҳ офтоб ва чаҳ моҳ вчаҳ рӯаст он
یا رب چه آفتاب و چه ماه وچه روست آن
Гар бар расанд коФти хуршед ва моҳ кист
گر بر رسند کآفت خورشید و ماه کیست
Хуршеду моҳ ҳар ду бигӯянд ӯст он
خورشید و ماه هر دو بگویند اوست آن
Аз нури маҳзи хилқат ӯ офарӣда анд
از نورِ محض خلقتِ او آفریده اند
Чун халқи хокён на з нашав ва нимуваст он
چون خلقِ خاکیان نه ز نشو و نموست آن
Ушшоқро зи санги маломат ҳиҷоб нест
عشّاق را ز سنگ ملامت حجاب نیست
Он кӯ надошт тоқат сангӣ сабуаст он
آن کو نداشت طاقتِ سنگی سبوست آن
ё раб буд ки ёди нзорӣ ҳаме кунанд
یا رب بود که یاد نزاری همی کنند
Дар боргоҳи хусрави офоқи дӯстон
در بارگاهِ خسرو آفاق دوستان
Он шоҳи сарфароз ки дар ҷанби рояташ
آن شاهِ سرفراز که در جنب رایتش
Бар чарх нест атлси азрақи ргўсти он
بر چرخ نیست اتلس ازرق رگوست آن