эй зи офтоби сунъи ту як зарраи коинот

ای ز آفتاب صنع تو یک ذره کاینات

Файзи ту ақлро мададу рӯҳро ҳаёт

فیض تو عقل را مدد و روح را حیات

Ҳар зарра гашта шоҳӣ ва ҳар қатраи шоҳидӣ

هر ذره گشته شاهی و هر قطره شاهدی

Лутфи ту чун ба хок сияҳ карда илтифот

لطف تو چون به خاک سیه کرده التفات

Дар коинот ҳар чаҳ бидон фахр ме кунанд

در کاینات هر چه بدان فخر می‌کنند

Ҷузи бандагии ту ҳама ҳшўасту тараот

جز بندگی تو همه حشو است و ترّهات

Бо зикри ту ки мӯнис ҷонасту рӯҳи дил

با ذکر تو که مونس جان است و روح دل

Фориғи з каъбаему муназзаҳи зи сўмнот

فارغ ز کعبه‌ایم و منزّه ز سومنات

Ҳар чанд хоксораму осӣу пари гуноҳ

هر چند خاکسارم و عاصیّ و پر گناه

Умед дорам аз карамати халъати наҷот

امید دارم از کرمت خلعت نجات

Хуррам касе ки бо ту кунад ошноӣ Эй

خرّم کسی که با تو کند آشنایی‌ای

Вази нур Мустафо расадаш равшаноӣ Эй

وز نور مصطفی رسدش روشنایی‌ای

эй хоҷае ки хусрави гардун ғулом туаст

ای خواجه‌ای که خسرو گردون غلام توست

Бар манзари ?дании Фтдлӣ мақом туаст

بر منظر دَنی فَتَدَلیّ مقام توست

То даври рӯзгор буд даври даври ту

تا دور روزگار بود دور دور تو

То номи коинот буд ном ном туаст

تا نام کاینات بود نام نام توست

Чандон ки ақли роҳи баради эҳтироми ту

چندان که عقل راه برد احترام تو

Чандон ки ваҳм сайр кунад эҳтишом туаст

چندان که وهم سیر کند احتشام توست

Доими сафои чеҳра ӣ субҳу саводи шом

دایم صفای چهره‌ی صبح و سواد شام

Аз нур рӯйу соя ӣ зулф чу шом туаст

از نور روی و سایه‌ی زلف چو شام توست

Зинҳор аз ҷаҳон , назари лутф , брмдор

زنهار از جهان، نظرِ لطف، برمدار

Кин ҳам харобаи ист ки дар иҳтимом туаст

کاین هم خرابه‌ایست که در اهتمام توست

Кӯси саодати ту бар афлок ме зананд

کوس سعادت تو بر افلاک می‌زنند

Вази баҳри ту мунодӣ лўлок ме зананд

وز بهر تو منادی لولاک می‌زنند

Хуши вақти он ки ошиқ садиқ Акбараст

خوش وقت آن که عاشق صدیق اکبرست

Дар роҳи дайни мувофиқ садиқ Акбараст

در راه دین موافق صدیق اکبرست

Чун офтоби равшан ва чун субҳ содиқ аст

چون آفتاب روشن و چون صبح صادق است

Ҳар кӯи муҳиби содиқ садиқ Акбараст

هر کو محب صادق صدیق اکبرست

Дар маъразӣ ки дами зи сафо ва вафо зананд

در معرضی که دم ز صفا و وفا زنند

Он кист кӯи мутобиқ садиқ Акбараст

آن کیست کو مطابق صدیق اکبرست

Бигзор ҷумла дар раҳи сидқу қабули дайн

بگذار جمله در ره صدق و قبول دین

Бинмо касе ки собиқ садиқ Акбараст

بنما کسی که سابق صدیق اکبرست

Инсофи он ки хотири шӯрида қосир аст

انصاف آن که خاطر شوریده قاصر است

Аз мдҳтӣ ки лоиқ садиқ Акбараст

از مدحتی که لایق صدیق اکبرست

Он кас ки буд тақвоу таҷреди кор ӯ

آن کس که بود تقوی و تجرید کار او

Ҳам мӯниси паямбар ва ҳам ёри ғор ӯ

هم مونس پیمبر و هم یار غار او

Чун басти баҳри дайни Муҳамади миёни умр

چون بست بهر دین محمد میان عمر

Дар ҳам шикасти гардани гарданкашони умр

در هم شکست گردن گردنکشان عمر

Бар бод рафт хирмани куффори хоксор

بر باد رفت خرمن کفار خاکسار

Чун баркашид ханҷар оташ фишон умр

چون برکشید خنجر آتش‌فشان عمر

Хуршеди дайн ба авҷи камоли он замон расед

خورشید دین به اوج کمال آن زمان رسید

Кондохти соя бар сари исломёни умр

کانداخت سایه بر سر اسلامیان عمر

Дасташ ба Маккаи гардани қайсари бузад ба рӯм

دستش به مکه گردن قیصر بزد به روم

Чун гашт бар мамолики дайни қаҳрамони умр

چون گشت بر ممالک دین قهرمان عمر

Ҳам осмони дониш ва ҳам офтоби адл

هم آسمان دانش و هم آفتاب عدل

Ҳмхўобаҳ ӣ Муҳамади охири замони умр

همخوابه‌ی محمد آخر زمان عمر

Он кӯ ба теғи шаръи набӣ ошкор кард

آن کو به تیغ شرع نبی آشکار کرد

Бунёди дайн ба бозуии худ устувор кард

بنیاد دین به بازوی خود استوار کرد

Хулди барин нишемани Усмон бо ҳаёст

خلد برین نشیمن عثمان با حیاست

Ҷиноти адани маскани Усмон бо ҳаёст

جنات عدن مسکن عثمان با حیاست

Маи пеши хеши хирманӣ аз нур гирд кард

مه پیش خویش خرمنی از نور گرد کرد

То хӯшаи чини хирмани Усмон бо ҳаёст

تا خوشه چین خرمن عثمان با حیاست

Шамъӣ ки равшанаст шабистони ҷон ӯ

شمعی که روشن است شبستان جان او

Нури даруни равшани Усмон бо ҳаёст

نور درون روشن عثمان با حیاست

Хасми худоу хасм расӯласту хасми худ

خصم خدا و خصم رسول است و خصم خود

Он беҳаё ки душмани Усмон бо ҳаёст

آن بی حیا که دشمن عثمان با حیاست

То домани қиёмат ва то рӯзи растхез

تا دامن قیامت و تا روز رستخیز

Дасти убайду домани Усмон бо ҳаёст

دست عبید و دامن عثمان با حیاست

Он кӯи нахусти баҳри набии симу зари ббохт

آن کو نخست بهر نبی سیم و زر بباخت

Вонгаҳ барои қӯти дайни ҷону сари ббохт

وانگه برای قوت دین جان و سر بباخت

Султони авлиёу шаҳ асФё алӣаст

سلطان اولیا و شه اصفیا علیست

Бгзидаҳи муҳаррами ҳарам кибриё алӣаст

بگزیده مُحرِم حرم کبریا علیست

Машъал фурӯз шаҳи раҳи дайн зулфиқор ӯст

مشعل فروز شه‌رَه دین ذوالفقار اوست

Чобуки савори маърака ӣ лоФтӣ алӣаст

چابک سوار معرکه‌ی لافتی علیست

Он кас ки илму ҳаламу сахо хатм шуд бар ӯ

آن کس که علم و حلم و سخا ختم شد بر او

Ъам зода ӣ Муҳамаду шер худо алӣаст

عم زاده‌ی محمد و شیر خدا علیست

Вони кӯ ба оби теғи фурӯи шасти гирди куфр

وآن کو به آب تیغ فرو شست گرد کفر

Аз рӯй дайни мубориз хибргшо алӣаст

از روی دین مبارز خیبرگشا علیست

Мискини убайди хоки саги кӯии он кас аст

مسکین عبید خاک سگ کوی آن کس است

Кӯ аз сегон хок дар Муртазо алӣаст

کو از سگان خاک در مرتضی علیست

Ҳошо ки илтиҷо ба дигар кас буд маро

حاشا که التجا به دگر کس بود مرا

Меҳри ҳусайну ҳуби ҳасани бас буд маро

مهر حسین و حب حسن بس بود مرا

эй дили гушоиш аз дар аҳли сафои талаб

ای دل گشایش از در اهل صفا طلب

Давлати зи Ямани пайравии Мустафои талаб

دولت ز یُمن پیروی مصطفی طلب

Вар боядат ки дидаи ҷонро ҷилои диҳӣ

ور بایدت که دیده جان را جلا دهی

Аз гирди хоки пои набии тўтёи талаб

از گرد خاک پای نبی توتیا طلب

Дар нестии гурез ва з ҳастӣ карона кун

در نیستی گریز و ز هستی کرانه کن

Авҷи сарири малики бақо дар фанои талаб

اوج سریر ملک بقا در فنا طلب

Ганҷии сети офият ки ба шоҳон наме расад

گنجی‌ست عافیت که به شاهان نمی‌رسد

Он ганҷи номагар талабӣ аз гадои талаб

آن گنج‌نامه گر طلبی از گدا طلب

Бас оҷизанд халқ , ба кас илтиҷо макун

بس عاجزند خلق، به کس التجا مکن

Ҳар орзӯ ки май талабӣ аз худои талаб

هر آرزو که می‌طلبی از خدا طلب

Бо халқ ҳар карам ки кунад чун худо кунад

با خلق هر کرم که کند چون خدا کند

Бошад ки ногаҳони назарии сӯй мо кунад

باشد که ناگهان نظری سوی ما کند