Сад чашма ӣ заҳр аз лаби доғи дили мо рехт

صد چشمه ی زهر از لب داغ دل ما ریخت

Ғами равғани талхӣ ба чароғи дили мо рехт

غم روغن تلخی به چراغ دل ما ریخت

Соқӣ чу май ишқ ту мекард ба соғар

ساقی چو می عشق تو می کرد به ساغر

Ҳар соф ки ояд ба аёғи дили мо рехт

هر صاف که آید به ایاغ دل ما ریخت

Ҳар гирди малолӣ ки бирафтанд зи дил ҳо

هر گرد ملالی که برفتند ز دل ها

Ишқати ҳама бар рӯй фироқи дили мо рехт

عشقت همه بر روی فراغ دل ما ریخت

Фарёд ки ҳар дил ки ба девори ғам ӯ

فریاد که هر دل که به دیوار غم او

Бар кӯфти сиррӣ чун зи димоғи дили мо рехт

بر کوفت سری چون ز دماغ دل ما ریخت

Обӣ ки банушед Хизр , ваа , ки зи мижгон

آبی که بنوشید خضر، وه، که ز مژگان

Дар бодияи ғам ба суроғи дили мо рехт

در بادیه غم به سراغ دل ما ریخت

Ин гиря ки баргашт ба дил аз раҳи дида

این گریه که برگشت به دل از ره دیده

Сад дона ӣ алмос ба доғи дили мо рехт

صد دانه ی الماس به داغ دل ما ریخت

Урфии ҷигар афшон набӯд нола ӣ ҳар дил

عرفی جگر افشان نبود ناله ی هر دل

Ин барги зи гулдаста ӣ боғи дили мо рехт

این برگ ز گلدسته ی باغ دل ما ریخت