Кӯи ошиқи озорӣ чу ӯ то ошиқ зораш кунад

هرگز به دلم یاد تو ای ماه نیامد

Шояд ки дарди ошиқӣ бо ошиқон ёраш кунад

کز دل به لبم ناله ی جانکاه نیامد

Хоҳам бутӣ чун ёри ман дил гирад аз дилдори ман

در خانه ام آن ماه نیامد عجبی نیست

То он чаҳ ӯ дар кор ман кардааст дар кораш кунад

در خانه ی درویش اگر شاه نیامد

Ғорат кунад аз як назари сабраши зи дили ҳушаши зи сар

بر هر سر راهی که مرا دید از آن پس

Созад зи хешаш бехабар аз ман хабардораш кунад

بار دگر آن شوخ از آن راه نیامد

Берун кунад он дилрабо аз хотираши ҷавру ҷафо

گاهی بر من آمدی آن ماه ولی غیر

Омўздши меҳру вафои ошиқи нигаҳ дораш кунад

تا کرد ز حال منش آگاه نیامد

То он бути паймони шикан қадре фазояд қадари ман

نشیند کسی ناله ی زارم شب هجران

Як чанд пеши хештан беқадар ва миқдораш кунад

کز ناله‌ی جان سوز منش آه نیامد

Аз чашм хоб олуд хеш аз лаъл меолуд хеш

دیگر چه به او نامه فرستم که فرستاد

Хобаст бедораш кунад мастаст ҳушёраш кунад

صد نامه که می آیم و آن گاه نیامد

Гардад рафиқи мумтаҳани хуши нағма чун мурғи чаман

گم گشت رفیق ار به ره عشق عجب نیست

Гар он бути ғунчаи даҳани гӯшӣ ба гуфтораш кунад

هر کس به سفر رفت از این راه نیامد