Ғам замона хӯрам ё фироқи ёри кашам ?
غم زمانه خورم یا فراق یار کشم؟
Ба тоқатӣ ки надорам кадоми бори кашам ?
به طاقتی که ندارم کدام بار کشم؟
На қӯтӣ ки тавонам канора ҷустан аз ӯ
نه قوتی که توانم کناره جُستن از او
На қудратӣ ки ба шӯхяш дар канори кашам
نه قدرتی که به شوخیش در کنار کشم
На дасти сабр ки дар остини ақл барам
نه دست صبر که در آستین عقل برم
На пои ақл ки дар домани қарори кашам
نه پای عقل که در دامن قرار کشم
зи дӯстон ба ҷафои сиргшт мардӣ нест
ز دوستان به جفا سیرگَشت مردی نیست
Ҷафои дӯст , занамгар на мрдўори кашам !
جفای دوست، زنم گر نه مردوار کشم!
Чу ме тавон ба сабурӣ кашид ҷаври аду
چو میتوان به صبوری کشید جور عدو
Чаро сабур набошам ки ҷаври ёри кашам
چرا صبور نباشم که جور یار کشم
Шароби хӯрдаи соқии зи ҷоми софии васл
شراب خورده ساقی ز جام صافی وصل
Заруратаст ки дарди сари хумори кашам
ضرورت است که درد سر خمار کشم
Гулӣ чу рӯй тугар дар чаман ба даст ояд
گلی چو روی تو گر در چمن به دست آید
Каминаи дидаи саъдяши пеши хори кашам
کمینه دیده سعدیش پیش خار کشم