Ғубор ҳастӣ худ серумаи чашм фано кардам
غبار هستی خود سرمه چشم فنا کردم
Кафии хокистари афсурда дар кор сабо кардам
کفی خاکستر افسرده در کار صبا کردم
Наме сӯзам агар барқи аҷал дар хирманам уфтад
نمی سوزم اگر برق اجل در خرمنم افتد
Ки ман дар хӯшагӣ аз коҳи гандумро ҷудо кардам
که من در خوشگی از کاه گندم را جدا کردم
зи фӯти вақт агар дар хӯн нишинам ҷой он дорад
ز فوت وقت اگر در خون نشینم جای آن دارد
Ки аз кафи домани пероҳани Юсуф раҳо кардам
که از کف دامن پیراهن یوسف رها کردم
Ба об рӯй ҳиммати хокро зар ме тавон кардан
به آب روی همت خاک را زر می توان کردن
Ғалат кардам ки умри хеши сарф кимиё кардам
غلط کردم که عمر خویش صرف کیمیا کردم
Сарангушти надомат чун нигаред хӯн ба ҳоли ман
سرانگشت ندامت چون نگرید خون به حال من
Мукаррари домани давлат ба даст омад раҳо кардам
مکرر دامن دولت به دست آمد رها کردم
Дили чарх аз ғубори хотири ман чун наяндешад
دل چرخ از غبار خاطر من چون نیندیشد
Мукаррари офтобашро чароғ Асия кардам
مکرر آفتابش را چراغ آسیا کردم
Чаҳ мурғами ман ки аз андозаи парвоз худ гӯям
چه مرغم من که از اندازه پرواز خود گویم
Чу барги гоҳи парвозӣ ба бол каҳрабо кардам
چو برگ گاه پروازی به بال کهربا کردم
Ба эксири қаноати хӯни оҳӯ машк ме гардад
به اکسیر قناعت خون آهو مشک می گردد
Ба хӯни дили ман ин таҳқиқ дар чин хто кардам
به خون دل من این تحقیق در چین ختا کردم
Зпиғоми ман муштоқ паҳлу мекунӣ холӣ
زپیغام من مشتاق پهلو می کنی خالی
Сазои ман ки мактуби турои бен қабо кардам
سزای من که مکتوب ترا بن قبا کردم
Чаро соиб набошад осмони зери нигини ман
چرا صائب نباشد آسمان زیر نگین من
Сухан хуршед шуд то мадҳи шоҳ авлиё кардам
سخن خورشید شد تا مدح شاه اولیا کردم
намеояд ба кӯшиши домани рӯзӣ ба кафи соиб
نمی آید به کوشش دامن روزی به کف صائب
Ва гарна ман тараддуди бештар аз Асия кардам
و گرنه من تردد بیشتر از آسیا کردم