Замин нишаста ба хоки сиёҳ аз ғами ту

زمین نشسته به خاک سیاه از غم تو

Кбўдпўши бӯи осмони зи мотами ту

کبودپوش بو آسمان ز ماتم تو

зи иштиёқи ту хуршеди доғ май сӯзад

ز اشتیاق تو خورشید داغ می سوزد

Чаҳ маҳви лола ва гул гаштааст шабнами ту ?

چه محو لاله و گل گشته است شبنم تو؟

Ба ҳарфи пучи нафас харҷ мекунӣ , ғофил

به حرف پوچ نفس خرج می کنی، غافل

Ки нест ганҷи ду олами баҳоии як дами ту

که نیست گنج دو عالم بهای یک دم تو

Ба нури ақли зи зулмоти нафаси беруни ой

به نور عقل ز ظلمات نفس بیرون آی

Магар ба ид мубаддил шавад муҳаррами ту

مگر به عید مبدل شود محرم تو

Дар нишоту тараб май занӣ , наме доне

در نشاط و طرب می زنی، نمی دانی

Ки ҳалқа дар маргаст қомати хами ту

که حلقه در مرگ است قامت خم تو

Басаст дар ғами дунё гиристан , то чанд

بس است در غم دنیا گریستن، تا چند

Ба шӯра зор шавад сарфи оби замзами ту ?

به شوره زار شود صرف آب زمزم تو؟

Чаҳ ҷои чашм , ки ҳар нӯки хори ин водӣ

چه جای چشم، که هر نوک خار این وادی

Сазад ки гиря кунад хӯн ба абр бе нами ту

سزد که گریه کند خون به ابر بی نم تو

Тараҳҳумӣ ба сулаймон ақл кун , то чанд

ترحمی به سلیمان عقل کن، تا چند

Ба даст дев хӯрд хӯни хеши хотами ту ?

به دست دیو خورد خون خویش خاتم تو؟

Мадори худ ба насиҳати ниҳодае соиб

مدار خود به نصیحت نهاده ای صائب

Турои гирифтаи ғами оламу марои ғами ту

ترا گرفته غم عالم و مرا غم تو