Хуши онкии раҳи айш ба ағёри гирифтем

خوش آنکه ره عیش به اغیار گرفتیم

Коми дили хеш аз лаби дилдори гирифтем

کام دل خویش از لب دلدار گرفتیم

Зини ашк ки акнӯн раҳи мо баст аз он кӯй

زین اشک که اکنون ره ما بست از آن کوی

Дар он сари кӯҳи роҳ ба ағёри гирифтем

در آن سر کوه راه به اغیار گرفتیم

Дар маҳфил ӯ муддаӣ аз ғайрати мо бор

در محفل او مدعی از غیرت ما بار

Бар басти бсди ҳасрат ва мо бори гирифтем

بر بست بصد حسرت و ما بار گرفتیم

Дардо ки супурдем ба зоғу зағани охир

دردا که سپردیم به زاغ و زغن آخر

Ҷоӣикаҳи бсди саъй ба гулзори гирифтем

جائیکه بصد سعی به گلزار گرفتیم

Аз кӣна ӣ бегонаи раҳи водии ҳиҷрон

از کینه ی بیگانه ره وادی هجران

Чун чора надидем ба ночори гирифтем

چون چاره ندیدیم به ناچار گرفتیم

Дар соя ӣ девори ту моро нагузорад

در سایه ی دیوار تو ما را نگذارد

Онро ки бар ӯ рахна ӣ девори гирифтем

آن را که بر او رخنه ی دیوار گرفتیم

Бедоди ту бар дили ҳама з онаст ки рӯзӣ

بیداد تو بر دل همه ز آنست که روزی

Дод дили зор аз ту дили озори гирифтем

داد دل زار از تو دل آزار گرفتیم

Пои баст ки созем ( саҳоб ) ин дили мафтӯн ?

پا بست که سازیم (سحاب) این دل مفتون؟

Ингор каз он турра ӣ таррори гирифтем

انگار کز آن طره ی طرار گرفتیم