Дили ошуфта аз номи шароби ноб май сӯзад

دل آشفته از نام شراب ناب می سوزد

Гиёҳи хушки моро ҳамчуи оташи об май сӯзад

گیاه خشک ما را همچو آتش آب می سوزد

Чунон аз оташи дили дӯди оҳами музтариби хезад

چنان از آتش دل دود آهم مضطرب خیزد

Ки пиндории дарун синаам симоб май сӯзад

که پنداری درون سینه ام سیماب می سوزد

Ба бсмлгоаҳи шавқи кӣнаи пардозони ман он сайдам

به بسملگاه شوق کینه پردازان من آن صیدم

Ки аз хунгармии ман домани қассоб май сӯзад

که از خونگرمی من دامن قصاب می سوزد

Ҷунун аз доғҳои тани чунонам бехабар дорад

جنون از داغ های تن چنانم بی خبر دارد

Ки гӯйии ҷома ӣ ҳастӣ магар дар хоб май сӯзад

که گویی جامه ی هستی مگر در خواب می سوزد

зи тоби шамъи рӯеи маҳфили мо равшанаст имшаб

ز تاب شمع رویی محفل ما روشن است امشب

Ки чун пероҳани фонӯси азуи маҳтоб май сӯзад

که چون پیراهن فانوس ازو مهتاب می سوزد

Салим аз баси дилами саргарми истиғфор исён аст

سلیم از بس دلم سرگرم استغفار عصیان است

Агар ашкии з мижгонам чакад , миҳроб май сӯзад

اگر اشکی ز مژگانم چکد، محراب می سوزد