Сӯии хам май ин дил махмур фиристем
سوی خم می این دل مخمور فرستیم
Парвона ӣ худро ба сӯй тавр фиристем
پروانه ی خود را به سوی طور فرستیم
Аз суҳбати ҳам , завқ буд тнгдлон ро
از صحبت هم، ذوق بود تنگدلان را
Бархез сулаймон ки пай мӯр фиристем
برخیز سلیمان که پی مور فرستیم
Соқии зи суфоли сари хами бода ба мо даҳ
ساقی ز سفال سر خم باده به ما ده
То соғари чинии сӯй фағфур фиристем
تا ساغر چینی سوی فغفور فرستیم
Сарвӣ чу ту дар гулшани фирдавси надидаи сет
سروی چو تو در گلشن فردوس ندیده ست
Дар ҷилваи дро то зи пай ҳур фиристем
در جلوه درآ تا ز پی حور فرستیم
Муштоқи турои тӯҳфаи ҳамин арз ниёз аст
مشتاق ترا تحفه همین عرض نیاز است
Ҷони худ чаҳ буд то зи раҳ давр фиристем
جان خود چه بود تا ز ره دور فرستیم
Дилро ба сӯии кӯии ту , чун Тифли дабистон
دل را به سوی کوی تو، چون طفل دبستان
Аз баси зи ту ранҷида , ба сад зӯр фиристем
از بس ز تو رنجیده، به صد زور فرستیم
Аз неши ҳарифони ҷаҳон то шавад озод
از نیش حریفان جهان تا شود آزاد
Дилро ба нҳонхонаҳ ӣ занбӯр фиристем
دل را به نهانخانه ی زنبور فرستیم
Моро биҷуз аз рӯҳ назирӣ нашносад
ما را بجز از روح نظیری نشناسد
Фирӯза ӣ худро ба ншобўр фиристем
فیروزه ی خود را به نشابور فرستیم
Хондем салими ин ғазали тоза ба ҳосид
خواندیم سلیم این غزل تازه به حاسد
То марҳами алмос ба носур фиристем
تا مرهم الماس به ناسور فرستیم