Зайнаб чун дид хусрави дайни монда бе муайян

زینب چون دید خسرو دین مانده بی‌معین

Рафт ва гирифт дасти ду Тифлони нозанин

رفت و گرفت دست دو طفلان نازنین

Оварад он ду то гули гулзори хеш ро

آورد آن دو تا گل گلزار خویش را

Бо чашми ашкбор ба назд эмоми дайн

با چشم اشکبار به نزد امام دین

Гуфто ки хоҳам эй шаҳи хубони з ҷон кунам

گفتا که خواهم ای شه خوبان ز جان کنم

Ин ҳадяро нисори қудумат дар ин замин

این هدیه را نثار قدومت در این زمین

эй ҳишмати аллоҳ аз раҳи эҳсони намои қабул

ای حشمت الله از ره احسان نما قبول

Рони малахи зи мӯри дили афсурдаи ғамин

ران ملخ ز مور دل افسرده غمین

Ин Авн ва он Муҳамад хоҳам кунам зи ҷон

این عون و آن محمد خواهم کنم ز جان

Онро фидои Акбару қурбони Асғари ин

آن را فدای اکبر و قربان اصغر این

Фармуд шаҳ ки ин ду марои нур дида анд

فرمود شه که این دو مرا نور دیده‌اند

Созами чисон равон бидам теғи мушрикин

سازم چسان روان بدم تیغ مشرکین

Марги бародару ғами ёрони маро бас аст

مرگ برادر و غم یاران مرا بس است

Манимо фузуни доғи ман зор беш аз ин

منما فزون داغ من زار بیش از این

Баҳри ниёзи зайнабу Авну Муҳамадаш

بهر نیاز زینب و عون و محمدش

Суданд ҷабҳа бар дар он қиблаи яқин

سودند جبهه بر در آن قبله یقین

Карданд баси ниёз ки шаҳ додани изни ҷанг

کردند بس نیاز که شه دادن اذن جنگ

Бар оли ду Тифли ғмздаҳи навраси ҳазин

بر آل دو طفل غمزده نورس حزین

Бӯсед он ду кӯдаку бўӣидшони зи меҳр

بوسید آن دو کودک و بوئیدشان ز مهر

Онро чу шохи наргис ва инро чу ёсамин

آن را چو شاخ نرگس و این را چو یاسمین

Пас зайнаби стмздаҳи пӯшеди шани кафан

پس زینب ستمزده پوشید شان کفن

Зад шона ба сунбули гесуии анбарин

زد شانه به سنبل گیسوی عنبرین

Теғ ва сипар бибаст ва равон кард ҳамчуи моҳ

تیغ و سپر ببست و روان کرد همچو ماه

Шуд зи осмони дидаи сршгш ба остин

شد ز آسمان دیده سرشگش به آستین

Тир ва камон фиканд ба мураккаби нишондашон

تیر و کمان فکند به مرکب نشاندشان

Гуфтӣ ки меҳру моҳ аён шуд зи бурҷи зин

گفتی که مهر و ماه عیان شد ز برج زین

Рафтанди сӯии разму барони дасту теғашон

رفتند سوی رزم و برآن دست و تیغشان

Бархест аз қазоу қадари сӯрати офарин

برخاست از قضا و قدر صورت آفرین

Он ҳамчуи раъди ғулғула дар шаш ҷиҳат фиканд

آن همچو رعد غلغله در شش جهت فکند

Вена зад чу барқи шуъла ба қалби сипоҳи кин

وین زد چو برق شعله به قلب سپاه کین

Он чун шарор аз нори адуро з по фиканд

آن چون شرار از نار عدو را ز پا فکند

Венаи дасту сари чӯби барги хазони рехт бар замин

وین دست و سر چوب برگ خزان ریخت بر زمین

Ва он ба аснони зи ҷисми адуи ҷӯй хӯн гушӯд

و آن به اسنان ز جسم عدو جوی خون گشود

Басти ин раҳи фирори з ҳар сӯ ба мушрикин

بست این ره فرار ز هر سو به مشرکین

Кард он садои алҳзри азкўФёни баланд

کرد آن صدای الحذر ازکوفیان بلند

Ин аломони расонад ба гардуни ҳафтумин

این الامان رساند به گردون هفتمین

Он фавҷи фавҷро ба сқр додашон мақар

آن فوج فوج را به سقر دادشان مقر

Ин фирқаи фирқаро ба дарак кардашон макин

این فرقه فرقه را به درک کردشان مکین

Гуфтои яке зи Ҳамза магар дорад ин нишон

گفتا یکی ز حمزه مگر دارد این نشان

Гуфт он дигар ба ҷаъфар тайёр монад ин

گفت آن دگر به جعفر طیار ماند این

Охири зи пеши ҷанги ду шерон гурехтанд

آخر ز پیش جنگ دو شیران گریختند

Рӯбоҳи вор ҳамла намуданд аз камӣн

روباه وار حمله نمودند از کمین

Тири аҷали зи абри балои рехт чун мтр

تیر اجل ز ابر بلا ریخت چون مطر

Бар ҷисми нозпарварашон гашти дилнишин

بر جسم ناز پرورشان گشت دلنشین

Он мефиканд найзау пайконаш аз ясор

آن می‌فکند نیزه و پیکانش از یسار

Он мезадӣ ба ханҷар баронаш аз ямин

آن می‌زدی به خنجر برانش از یمین

Охири ҳамон ду пайкари пок шариф шуд

آخر همان دو پیکر پاک شریف شد

Аз найзаи пораи пораи зи ҷаври мухолифӣн

از نیزه پاره پاره ز جور مخالفین

Гаштанди он ду Тифл ва фиканданд аз ?илам

گشتند آن دو طفل و فکندند از الم

Оташ ба қалби зайнаби ғмдидаҳи ҳазин

آتش به قلب زینب غمدیده حزین

Срдоди шоҳи ташна дар ин мотам ва кашид

سرداد شاه تشنه در این ماتم و کشید

Аз дидаи сайли ашку зи дили оҳи оташин

از دیده سیل اشک و ز دل آه آتشین

( ҳоҷиб ) зи доғи ин ду бародари сиришки рехт

(حاجب) ز داغ این دو برادر سرشک ریخت

Шояд шаванд шоФъ ӯ явми вопасин

شاید شوند شافع او یوم واپسین