Арбаъӣн омаду ашками з басар ме ояд
اربعین آمد و اشکم ز بصر میآید
Гӯиёи зайнаби маҳзуни з сафар ме ояд
گوئیا زینب محزون ز سفر میآید
Боз дар крбу балои шеван ва шинӣ барпост
باز در کرب و بلا شیون و شینی برپاست
Каз асирони раҳи шом хабар ме ояд
کز اسیران ره شام خبر میآید
Ҷарас аз сӯзи ҷигар нолдў гуяд ба мулло
جرس از سوز جگر نالدو گوید به ملا
Ки сакина ба сари қабр падар ме ояд
که سکینه به سر قبر پدر میآید
Гарчи поиш буд аз хори муғелони маҷрӯҳ
گرچه پایش بود از خار مغیلان مجروح
Ба сари қабри падари боз писар ме ояд
به سر قبر پدر باز پسر میآید
Равад равадӣ шинавам аз тарафи шоми магар
رود رودی شنوم از طرف شام مگر
Ам Лайлои басари наъш писар ме ояд
ام لیلا بسر نعش پسر میآید
Кош медод касе бар алии Акбари пайғом
کاش میداد کسی بر علی اکبر پیغام
К-эии ҳўони модари перати з сафар ме ояд
کای حوان مادر پیرت ز سفر میآید
Бо хабар нест магари қосими домод ки ки боз
با خبر نیست مگر قاسم داماد که که باز
Наварӯс аз паии дидори з сар ме ояд
نوعروس از پی دیدار ز سر میآید
Ба шаби айши ҷудои гаштгар аз васли арӯс
به شب عیش جدا گشت گر از وصل عروس
Нахли нокомии ваии боз бабр ме ояд
نخل ناکامی وی باز ببر میآید
Гар алии Асғар бе шери бидонад ки рубоб
گر علی اصغر بیشیر بداند که رباب
Бо ду пистони пар аз хӯн ҷигар ме ояд
با دو پستان پر از خون جگر میآید
Аз пари тиру лаби ташна фаромӯш кунад
از پر تیر و لب تشنه فراموش کند
Булбул оё дигар аз шавқ ба пар ме ояд
بلبل آیا دگر از شوق به پر میآید
эй сбогўӣ ба аббос ки аз ҷо бархез
ای صباگوی به عباس که از جا برخیز
Ам кулсуми ту хам гашта камар ме ояд
ام کلثوم تو خم گشته کمر میآید
Баъд аз ин номи канизии набарди каси бабраш
بعد از این نام کنیزی نبرد کس ببرش
Ки дили сӯхтаи вай ба хабар ме ояд
که دل سوخته وی به خبر میآید
( сомто ) аз чаҳ нагуфтӣ ки сари қабри ҳусайн
(صامتا) از چه نگفتی که سر قبر حسین
Ъобдни хӯни ҷигару дида тар ме ояд
عابدن خون جگر و دیده تر میآید