эй мсиби зи ҷаҳони сӯии ҷинон дар сафарам
ای مسیب! ز جهان سوی جَنان در سفرم
Шудаи пурхӯни ҷигарам
شده پُرخون جگرم
Биншин лаҳзае андари дами охир ба барам
بنشین لحظهای اندر دمِ آخر به برم
Шудаи пурхӯни ҷигарами кӯи ризои кӯи писарам
شده پُرخون جگرم، کو رضا، کو پسرم؟
Бас ки коҳидаҳ шуд аз садамаи занҷири танам
بس که کاهیده شد از صدمهٔ زنجیر، تنم
Об гашта баданам
آب گشته بدنم
Рақамӣ нест зи по то ба сари ман дигарам
رقمی نیست ز پا تا به سرِ من دگرم
Шудаи пурхӯни ҷигарами кӯи ризои кӯи писарам
شده پُرخون جگرم، کو رضا، کو پسرم؟
Дили афсурдау маҳзуну ҷигари хӯну ғариб
دلِ افسرده و محزون و جگرخون و غریب
Бепарастору табиб
بیپرستار و طبیب
На муайянӣаст ба болин на анисӣ ба серум
نه مُعینی است به بالین، نه اَنیسی به سرم
Шудаи пари хӯни ҷигарами кӯи ризои кӯи писарам
شده پُرخون جگرم، کو رضا، کو پسرم؟
Зад чунон барқи аҷали шуълаи маро бар тану ҷон
زد چنان برقِ اجل، شعله مرا بر تن و جان
Ки ба даврони ҷаҳон
که به دورانِ جهان
На дигар исм ба ҷои боз буд неи асарам
نه دگر اسم به جا باز بُوَد، نی اثرم
Шудаи пурхӯни ҷигарами кӯи ризои кӯи писарам
شده پُرخون جگرم، کو رضا، کو پسرم؟
Заҳри ҳорӯни ситамгари ҷигарамро бгдохт
زهرِ هارونِ ستمگر، جگرم را بگداخت
Ба дили оташи андохт
به دل آتش، انداخت
Сохт бемӯнису давр аз ватан ва дар ба дирам
ساخت بیمونس و دور از وطن و دربهدرم
Шудаи пурхӯни ҷигарами кӯи ризои кӯи писарам
شده پُرخون جگرم، کو رضا، کو پسرم؟
Қосидии кӯ ки равад аз бар ман сӯии ватан
قاصدی کو که رَوَد از بَرِ من سویِ وطن
Бо ғаму дарду мҳн
با غم و درد و محن
Ба муҳибон ва азизон бирасонад хабарам
به محبان و عزیزان برساند خبرم؟
Шудаи пурхӯни ҷигарами кӯи ризои кӯи писарам
شده پُرخون جگرم، کو رضا، کو پسرم؟
Ба ризо гуяд Аё нури ду чашмони падар
به رضا گوید ایا نورِ دو چشمانِ پدر!
Ба серум кун ту гузар
به سرم کن تو گذر
Ки ба роҳи ту буд мавсими мурдани назарам
که به راهِ تو بُوَد موسمِ مردن نظرم
Шудаи пурхӯни ҷигарами кӯи ризои кӯи писарам
شده پُرخون جگرم، کو رضا، کو پسرم؟
эй мсиби дам маргаст зи бедоди рисӣ
ای مسیب! دمِ مرگ است، ز بیدادرسی
Ҳамчуи мурғи қафасӣ
همچو مرغِ قفسی
Ёд ояд зи ҳусайни ҷад ба хӯни ғӯтаи варам
یاد آید ز حسین، جدِّ به خون غوطهورم
Шудаи пурхӯни ҷигарами кӯи ризои кӯи писарам
شده پُرخون جگرم، کو رضا، کو پسرم؟
Чу кунам ёди зи аҳволи тан бесар ӯ
چون کنم یاد ز احوالِ تنِ بیسرِ او
Ғарқаи хӯни пайкар ӯ
غرقه خون پیکرِ او
Рӯз чун шом шавад тира ба мади назарам
روز چون شام شود تیره به مدِّ نظرم
Шудаи пурхӯни ҷигарами кӯи ризои кӯи писарам
شده پُرخون جگرم، کو رضا، کو پسرم؟
зи ғами алътши вай ба лаби шати Фурот
ز غمِ «العطشِ» وی به لبِ شطِّ فرات
Шуд марои қатъи ҳаёт
شد مرا قطعِ حیات
Рӯз ва шаб гашта равони хӯни зи ду чашмони терм
روز و شب گشته روان، خون ز دو چشمانِ ترم
Шудаи пурхӯни ҷигарами кӯи ризои кӯи писарам
شده پُرخون جگرم، کو رضا، کو پسرم؟
Ваъда дидани рӯят ба қиёмат афтод
وعدهٔ دیدنِ رویت به قیامت افتاد
Оқибат дар Бағдод
عاقبت در بغداد
Бе ту мадфӯн шудаам мӯниси шому саҳарам
بی تو مدفون شدهام، مونسِ شام و سحرم
Шудаи пурхӯни ҷигарами кӯи ризои кӯи писарам
شده پُرخون جگرم، کو رضا، کو پسرم؟
Кас набӯд аз паии дафну кафани шоҳи шаҳид
کس نبود از پیِ دفن و کفَنِ شاهِ شهید
Шуд марои қатъи умед
شد مرا قطع، امید
Ҳамчу ( сомит ) ба хаданги ғами мотами сипарам
همچو «صامت» به خدنگِ غمِ ماتم سِپُرم
Шудаи пурхӯни ҷигарами кӯи ризои кӯи писарам
شده پُرخون جگرم، کو رضا، کو پسرم؟