Имрӯз буд вақти азои алии Акбар

امروز بُوَد وقتِ عزایِ علی اکبر

Сӯзади дили олами з барои алии Акбар

سوزد دلِ عالم ز برایِ علی اکبر

Ҳар кас ки шудӣ толиби дидори паямбар

هر کس که شدی طالبِ دیدارِ پیمبر

намекард тамошои лақои алии Акбар

می‌کرد تماشایِ لقایِ علی اکبر

Гардид муҳайёии хазони гулшани эҷод

گردید مُهیایِ خزان، گلشنِ ایجاد

Аз доғи қади сарви расои алии Акбар

از داغِ قدِ سروِ رسایِ علی اکبر

То шоми ғам аз крббло бар сари не буд

تا شامِ غم، از کرب‌وبلا بر سرِ نی بود

Ҷои сар аз ҷисми ҷудои алии Акбар

جایِ سرِ از جسم جدایِ علی اکبر

Чун ҷон ба фидои шаҳи лаб ташна намуданд

چون جان به فدایِ شهِ لب‌تشنه نمودند

Ҷони ҳамаи олам ба фидои алии Акбар

جانِ همه عالم به فدایِ علی اکبر!

Огоҳ касе нест зи доғи дили Лайлӣ

آگاه کسی نیست ز داغِ دلِ لیلی

Дар куну макони ғайри худои алии Акбар

در کون و مکان، غیرِ خدایِ علی‌ اکبر

Дар крбу балои коши забеҳи аллоҳ будӣ

در کرب‌وبلا کاش «ذبیح‌ِالله» بودی

То ҳадя кунад ҷон ба мнои алии Акбар

تا هدیه کند جان به منایِ علی‌اکبر

Зарроти ду олами ҳамаи якҷо шудаи ҳайрон

ذراتِ دو عالم همه یک‌جا شده حیران

Аз дӯстӣу аҳду вафои алии Акбар

از دوستی و عهد و وفایِ علی‌اکبر

Дар роҳ падар дод сару сарвар дайн шуд

در راهِ پدر داد سر و سَرورِ دین شد

Аҳсанти зи сидқу зи сафои алии Акбар

احسنت ز صدق و ز صفایِ علی‌اکبر

Умеди шаҳон дар сафи маҳшар ҳама инаст

امیدِ شهان در صفِ محشر همه این است

Созанди макони зери ливои алии Акбар

سازند مکان زیرِ لوایِ علی‌اکبر

Ҳмхўобаҳи қабри писар Фотима гардид

همخوابهٔ قبرِ پسرِ فاطمه گردید

Шуд қабри ҳусайн қибла намой алии Акбар

شد قبرِ حسین، قبله‌نمایِ علی‌اکبر

Кун гиря ки то кунҷи шабистони лаҳад ро

کن گریه که تا کنجِ شبستانِ لحد را

Равшан кунӣ аз нуру зёии алии Акбар

روشن کنی از نور و ضیایِ علی‌اکبر

Хӯни дили Лайлӣ ки шуд аз дидаи равона

خونِ دلِ لیلی که شد از دیده روانه

Гардид шаби айши ҳинои алии Акбар

گردید شبِ عیش، حنایِ علی‌اکبر

Зайнаб ба тани худ зи мҳни сохтаи сад чок

زینب به تنِ خود ز مِحَن ساخته صد چاک

Пероҳани тоқат чун қабои алии Акбар

پیراهنِ طاقت، چو قبایِ علی‌اکبر

Пайваста ба сина занад аз ғуссаи сакина

پیوسته به سینه زند از غصه، سکینه

Дар Марӣа аз крбу балои алии Акбар

در «ماریه» از کرب‌وبلایِ علی‌اکبر

( сомит ) накунад шоҳии кунин таманно

«صامت» نکند شاهیِ کَونَین تمنا

Гардад чу саги кӯии гадои алии Акбар

گردد چو سگِ کویِ گدایِ علی‌اکبر