Аё дарвеши ръноўш чу мутриб бо самоъати хуш
ایا درویش رعناوش چو مطرب با سماعت خوش
Бензади раҳ равон бозӣаст рақси хирси вори ту
بنزد ره روان بازیست رقص خرس وار تو
Чаҳ гӯйии неи равиши ӣнҷо бхрқаҳаст об рӯй ту
چه گویی نی روش اینجا بخرقه است آب روی تو
Чаҳ гӯйии ҳамчуи гул танҳо брнгсти эътибори ту
چه گویی همچو گل تنها برنگست اعتبار تو
Баҳона бар қадар чаҳ наҳй қадам дар роҳ на , гарчи
بهانه بر قدر چهنهی قدم در راه نه، گرچه
зи дасти ҷабр дар бандаст пои ихтиёри ту
ز دست جبر در بندست پای اختیار تو
Босби ҳиммати олии туоне раҳи басари бурдан
باسب همت عالی توانی ره بسر بردن
Гар ояд дар рикоби ҷаҳди пои иқтидори ту
گر آید در رکاب جهد پای اقتدار تو
Бдрўишии бкнҷӣ дар бирав биншин ва пас бингар
بدرویشی بکنجی در برو بنشین و پس بنگر
Ҷҳондорони ғуломи ту ҷаҳони малику ъқори ту
جهانداران غلام تو جهان ملک و عقار تو
Турои орӣ буд зони пас шароб аз ҷоми ҷам хӯрдан
ترا عاری بود زآن پس شراب از جام جم خوردن
Чу шуд дар ҷашни дарвешии зи хурсандии ъқори ту
چو شد در جشن درویشی ز خرسندی عقار تو
зи талхии турш рӯйон шуд охири коми ширинат
ز تلخی تُرُش رویان شد آخر کام شیرینت
Чу шӯри об қаноат шуд шароби хуши гўори ту
چو شور آب قناعت شد شراب خوش گوار تو
Туро дар гулистон ҷон ҳазоронанд чун булбул
ترا در گلستان جان هزارانند چون بلبل
Вазин боб ар сухани гӯйӣ буд фасли баҳори ту
وزین باب ار سخن گویی بود فصل بهار تو
Сухан монанд бустонасту зикри дӯст дар ваии гул
سخن مانند بستانست و ذکر دوست در وی گل
Чу булбули сад наво дорад дарини бустони ҳазор ту
چو بلبل صد نوا دارد دراین بستان هزار تو
Ту чангӣ дар канори даҳру соҳиб дил кунад ҳолат
تو چنگی در کنار دهر و صاحب دل کند حالت
Чу зини сон дар наво ояд бришми вори тори ту
چو زین سان در نوا آید بریشم وار تار تو
Чу тез оҳанг шуд қавлат , набошад сайфи фарғонӣ
چو تیز آهنگ شد قولت، نباشد سیف فرغانی
Ғазалсозӣ дарин парда ки бошад дастёри ту
غزل سازی درین پرده که باشد دستیار تو