Дигар гуфтӣ мусофир кист дар роҳ

دگر گفتی مسافر کیست در راه

Касе кӯ шуд зи асли хеши огоҳ

کسی کو شد ز اصلِ خویش آگاه

Мусофири он буд кӯ бугзарад зуд

مسافر آن بود کو بگذرد زود

зи худ софӣ шавад чун оташ аз дӯд

ز خود صافی شود چون آتش از دود

Сулӯкаши сайри кашфии дони зи имкон

سلوکش سیرِ کشفی دان ز امکان

Сӯии воҷиб ба тарки шину нуқсон

سوی واجب به ترکِ شَیْن و نقصان

Бъкси сайри аввал дар манозил

بعکسِ سیرِ اوّل در منازل

Равад то гардад ӯ инсони комил

رود تا گردد او انسانِ کامل

Хониш
бхш 17 - ҷвоб бҳ сол овл — рзо